कात्यायनी षष्टम  

नवरात्र


कात्यायनी षष्टम
कात्यायनी देवी
विवरण नवरात्र के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप 'कात्यायनी' की पूजा होती है।
स्वरूप वर्णन इनकी चार भुजायें हैं, दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है, नीचे का हाथ वरदमुद्रा में है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल है और इनका वाहन सिंह है।
पूजन समय चैत्र शुक्ल षष्ठी को प्रात: काल
धार्मिक मान्यता महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की, इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं। माँ कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
संबंधित लेख कात्यायनी पीठ वृन्दावन
अन्य जानकारी आज के दिन साधक का मन आज्ञाचक्र में स्थित होता है। योगसाधना में आज्ञाचक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=कात्यायनी_षष्टम&oldid=595810" से लिया गया