अमरनाथ यात्रा  

अमरनाथ यात्रा
अमरनाथ गुफ़ा में स्वनिर्मित शिवलिंग
विवरण जम्मू-कश्मीर की दुर्गम वादियों में स्थित अमरनाथ धाम हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए काफी महत्व रखता है। चार धाम की तरह भक्तगण इस पूजनीय यात्रा को जीवन में एक बार करने की इच्छा अवश्य रखते हैं।
राज्य जम्मू-कश्मीर
देश भारत
अनुयायी हिन्दू
देवता शिव
संबंधित लेख अमरनाथ, शेषनाग झील, पहलगाम, वैष्णो देवी
अन्य जानकारी यात्रा हेतु पहलगाम से जाने वाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। एक और छोटा रास्ता श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर स्थित बालटाल से है। बालटाल से अमरनाथ गुफ़ा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है, किन्तु यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है।

अमरनाथ यात्रा को उत्तर भारत की सबसे पवित्र तीर्थयात्रा माना जाता है। यात्रा के दौरान भारत की विविध परंपराओं, धर्मों और संस्कृतियों की झलक देखी जा सकती है। अमरनाथ यात्रा में शिव भक्तों को कड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। बेशक यह यात्रा थोड़ी कठिन है, लेकिन कश्मीर के मनोरम प्रकृति नजारों और धार्मिक तथा अध्यात्म का अनोखा पुट इससे जुड़ा है। रास्ते उबड़-खाबड़ हैं, रास्ते में कभी बर्फ़ गिरने लग जाती है, कभी बारिश होने लगती है तो कभी बर्फीली हवाएं चलने लगती हैं। फिर भी भक्तों की आस्था और भक्ति इतनी मज़बूत होती है कि यह सारे कष्ट महसूस नहीं होते और बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए एक अदृश्य शक्ति से खिंचे चले आते हैं। यह माना जाता है कि अगर तीर्थयात्री इस यात्रा को सच्ची श्रद्धा से पूरा करें तो वह भगवान शिव के साक्षात दर्शन पा सकते हैं। जून से लेकर अगस्त माह तक दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

विद्वान मत

कई विद्वानों का मत है कि शंकर जी जब पार्वती जी को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा। अमरनाथ गुफ़ा का सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गड़रिये को चला। आज भी चौथाई चढ़ावा मुसलमान गड़रिये के वंशजों को मिलता है। यह एक ऐसा तीर्थस्थल है, जहां फूल-माला बेचने वाले मुसलमान होते हैं। अमरनाथ गुफ़ा एक नहीं है, बल्कि अमरावती नदी पर आगे बढ़ते समय और कई छोटी-बड़ी गुफ़ाएं दिखती हैं। सभी बर्फ से ढकी हैं। मूल अमरनाथ से दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग-अलग हिमखंड हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अमरनाथ यात्रा (हिंदी) hindi.news18। अभिगमन तिथि: 20 जून, 2018।

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