हीनयान  

हीनयान बौद्ध धर्म की एक प्राचीन शाखा है जो इस धर्म के आरंभिक रूप को मानती है। हीनयान बौद्ध धर्म के दो सम्प्रदायों में से एक हैं। इसे थेरवाद भी कहा जाता है। थेरवाद या हीनयान बुद्ध के मौलिक उपदेश ही मानता है। बौद्ध धर्म का दूसरा सम्प्रदाय महायान थेरावादियों को "हीनयान" (छोटी गाड़ी) कहते हैं। श्रावकयान और प्रत्येक बुद्धयान को हीनयान और बोधिसत्त्वयान को महायान कहते हैं। बौद्ध दर्शन के दिव्यावदान में महायान एवं हीनयान दोनों के अंश पाए जाते हैं।

Seealso.gifहीनयान का उल्लेख इन लेखों में भी है: बौद्ध धर्म, बौद्ध दर्शन, महायान, महायान साहित्य, फ़ाह्यान, ह्वेन त्सांग एवं अल्प

अर्थ

'हीन' शब्द से गिरे हुए या नीचे का जो बोध आज होता है, आरंभ में हीनयान का यह आशय नहीं था। इसका अर्थ था, देवता या स्वर्ग की स्थिति में विश्वास न करना। हीनयान के अनुसार गौतम बुद्ध महामानव थे। वह उन्हें आदर और सम्मान का पात्र मानता है। उसमें महायान की भांति गौतम को अलौकिक और अमानत रूप प्रदान नहीं किया जाता। हीनयान में भिक्षु अष्टांगिक मार्ग का अनुगमन करता है और चार आर्य सत्यों में विश्वास करता है।

बुद्धवचन

वैभाषिक महायानसूत्रों को बुद्धवचन नहीं मानते, क्योंकि उनमें वर्णित विषय उन्हें अभीष्ट नहीं हैं। वे केवल हीनयानी त्रिपिटक को ही बुद्धवचन मानते हैं। महायानी आचार्य हीनयानी और महायानी सभी सूत्रों को बुद्धवचन मानते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ


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