बिम्बिसार  

बिम्बिसार
बिम्बिसार
जन्म 559 ई. पू.
मृत्यु तिथि 493 ई. पू.
संतान अजातशत्रु
शासन काल 544 ई. पू. से 493 ई. पू.
धार्मिक मान्यता बौद्ध धर्म
राजधानी 'गिरिव्रज' (राजगीर)
उत्तराधिकारी अजातशत्रु
वंश हर्यक वंश
संबंधित लेख गौतम बुद्ध, अजातशत्रु
विशेष बिम्बिसार ने हर्यक वंश की स्थापना 544 ई. पू. में की थी। इसके साथ ही राजनीतिक शक्‍ति के रूप में बिहार का सर्वप्रथम उदय हुआ।
अन्य जानकारी 'सुत्तनिपात' की अट्ठकथा के पब्बज सुत्त के अनुसार बिम्बिसार ने संन्यासी गौतम का प्रथम दर्शन पाण्डव पर्वत के नीचे अपने राजभवन के गवाक्ष से किया और उनके पीछे जाकर उन्हें अपने राजभवन में आमन्त्रित किया था।

बिम्बिसार (544 ई. पू. से 493 ई. पू.) एक कूटनीतिज्ञ और दूरदर्शी शासक था। उसने हर्यक वंश की स्थापना की थी। बिम्बिसार को मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उसने ने 'गिरिव्रज' (राजगीर) को अपनी राजधानी बनाया था। कौशल, वैशाली एवं पंजाब आदि से वैवाहिक सम्बंधों की नीति अपनाकर बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य का बहुत विस्तार किया। बिम्बिसार गौतम बुद्ध के सबसे बड़े प्रश्रयदाता थे।

परिचय

बिम्बिसार का जन्म 558 ईसा पूर्व के लगभग हुआ था। मगध के राजा बिम्बिसार की राजधानी राजगीर थी। वे पन्द्रह वर्ष की आयु में ही राजा बने और अपने पुत्र 'अजातसत्तु' (संस्कृत- अजातशत्रु) के लिए राज-पाट त्यागने से पूर्व बावन वर्ष इन्होंने राज्य किया। प्रसेनजित की बहन और कोसल की राजकुमारी 'महाकोशला' इनकी पत्नी और अजातशत्रु की माँ थी। 'चेल्लना', 'खेमा' अथवा 'क्षेमा', 'सीलव' और 'जयसेना' नामक इनकी अन्य पत्नियाँ भी थीं। विख्यात वीरांगना अम्बापालि से इनका विमल कोन्दन्न नामक पुत्र भी था। बिम्बिसार बुद्ध के उपदेशों से बहुत प्रभावित थे। इनकी पत्नी भिक्षुणी बन गई थीं।[1]

महावग्ग का उल्लेख

'महावग्ग' के अनुसार बिम्बिसार की 500 रानियाँ थीं। उसने अवंति के शक्‍तिशाली राजा चन्द्र प्रद्योत के साथ दोस्ताना सम्बन्ध बनाया। सिन्ध के शासक रूद्रायन तथा गांधार के मुक्‍कु रगति से भी उसका दोस्ताना सम्बन्ध था। उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। वहाँ अपने पुत्र अजातशत्रु को उपराजा नियुक्‍त किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. दीक्षा की भारतीय परम्पराएँ (हिंदी), 87।
  2. बिम्बिसार (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 08 नवम्बर, 2013।

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