पदार्थ धर्म संग्रह  

पदार्थ धर्म संग्रह पर रचित चार अन्य अवान्तर टीकाएँ

कालक्रम के अनुसार यद्यपि निम्नलिखित चार टीकाएँ वैशेषिक के प्रकीर्ण साहित्य में परिगणित की जा सकती हैं। किन्तु प्रशस्तपाद भाष्य की प्रमुख आठ टीकाओं में इनकी गणना के कारण इनका परिचय यहीं पर दिया जा रहा है।

पद्मनाभ रचित सेतु टीका

यह टीका पद्मनाभ मिश्र ने लिखी है। पद्मनाभ मिश्र का समय 1800 ई. माना जाता है। पद्मनाभ मिश्र ने न्यायकन्दली पर भी टीका लिखी है, अत: इस टीका पर न्यायकन्दली का भी प्रभाव परिलक्षित होता है। उदाहरणतया तमस के द्रव्यत्व के खण्डन के प्रसंग में पद्मनाभ ने सेतु टीका में उदयन के मत का खण्डन तथा श्रीधर के मत का समर्थन किया है। यह टीका द्रव्य पर्यन्त मिलती है। सेतु टीका में पद्मनाभ मिश्र ने ऐसे 23 तत्त्व गिनाये हैं, जिन्हें पदार्थ मानने का कई पूर्व पक्षी आग्रह करते हैं। किन्तु पद्मानाभ ने उनका खण्डन करके सात ही पदार्थ हैं, यह मत परिपुष्ट किया है।

संबंधित लेख


और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=पदार्थ_धर्म_संग्रह&oldid=494473" से लिया गया