स्वप्न  

Disamb2.jpg स्वप्न एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- स्वप्न (बहुविकल्पी)

स्वप्न आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सोते समय की चेतना की अनुभूतियों को कहते हैं। स्वप्न के अनुभव की तुलना मृगतृष्णा के अनुभवों से की गई है। 'स्वप्न' मुखयतः 'स्वप्न निद्रा' की अवस्था में आते हैं। सुषुप्ति अवस्था में देखे गये स्वप्न प्रायः सुबह तक याद नहीं रहते। यह आवश्यक नहीं कि स्वप्न में देखा गया सब कुछ अर्थपूर्ण हो। मानस और चिकित्सा शास्त्रियों के अनुसार जो व्यक्ति अनावश्यक इच्छाओं, चंचल भावनाओं, उच्च आकांक्षाओं और भूत-भविष्य की चिंता से अपने को मुक्त रखते हैं, वही गहरी निद्रा ले पाते हैं। गहरी निद्रा स्वस्थ जीवन के लिए परम आवश्यक है।

धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म शास्त्रों - अथर्ववेद, योगसूत्र, पुराण, उपनिषदों इत्यादि में स्वप्नों का आध्यात्मिक विश्लेशण मिलता है, जिसके अनुसार स्वप्न की क्रिया मनुष्य की आत्मा से जुड़ी है और आत्मा परमात्मा से। मन की कल्पना शक्ति असीम है। महर्षि वेदव्यास 'ब्रह्मसूत्र' में बताते हैं कि मस्तिष्क में पिछले जन्मों का ज्ञान सुषुप्त अवस्था में रहता है। शुद्ध आचरण वाले धार्मिक और शांत चित्त व्यक्ति के सपने, दैविक संदेशवाहक होने के कारण, सत्य होते हैं। परंतु चिंताग्रस्त या रोगी व्यक्ति का मन अशांत होने के कारण उसके स्वप्न निष्फल होते हैं। स्वप्न भावी जीवन यात्रा से जुड़े शुभ और अशुभ प्रसंग, यहां तक कि विपत्ति, बीमारी और मृत्यु की पूर्व सूचना देते हैं। गौतम बुद्ध के जन्म से कुछ दिन पहले उनकी माता रानी माया ने स्वप्न में एक सूर्य सा चमकीला, 6 दांतों वाला सफेद हाथी देखा था, जिसका अर्थ राज्य के मनीषियों ने एक उच्च कोटि के जगत प्रसिद्ध राजकुमार के जन्म का सूचक बताया, जो सत्य हुआ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=स्वप्न&oldid=616600" से लिया गया