सुबालोपनिषद  

शुक्ल यजुर्वेद से सम्बन्धित इस उपनिषद में कुल सोलह खण्ड हैं। इनमें प्रश्नोत्तर शैली में अध्यात्मदर्शन के गूढ़ तत्त्वों का विवेचन किया गया है।

पहला और दूसरा खण्ड

इन दोनों खण्डों में रैक्व ऋषि के द्वारा प्रश्न पूछे जाने पर घोर अंगिरस ऋषि ने सृष्टि की प्रक्रिया के विषय में विवेचन करते हुए विराट ब्रह्म द्वारा सभी वर्णों, प्राण, वेदों, वृक्षों, पशु-पक्षियों तथा समस्त जीवों के सृजन का उल्लेख किया है। छान्दोग्य उपनिषद के छठे अध्याय में इसका पूरा वर्णन है।

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