अंगारा प्रदेश  

भू-विज्ञान के अनुसार एशिया के उत्तरी भाग के प्राचीनतम स्थलखंड को अंगारा प्रदेश कहते हैं। इसका राजनीतिक महत्व नहीं है, परंतु भौगोलिक दृष्टि से इसका अध्ययन बहुत उपयोगी है। इस प्रदेश की भू-वैज्ञानिक खोज अभी अपेक्षाकृत कम हुई है। रूसी भूवैज्ञानिकों ने अपने अन्वेषणात्मक कार्यों द्वारा इसे बहुत अंशों में लारेशिया तथा बाल्टिक प्रदेश के समान बताया है। इस प्रदेश की पृष्ठतलीय चट्टानें कैबियन पूर्व की हैं, जिनमें अति प्राचीन गिरि-निर्माण-संरचना प्राप्त है और इनमें प्रचुर मात्रा में परिवर्तन हुआ है। इन तलीय चट्टानों के ऊपर कैबियन युग से लेकर 'अंतर्युगीन' (पैलिओजोइक, मेसोजोइक और केनोजोइक) चट्टानों का जमाव मिलता है।

भौगोलिक संरचना

कोबर ने रूसी विद्वानों के सदृश ही इसे यनीसी नदी के मुहाने से क्रांसनोयार्स्कें को मिलाती हुई रेखा द्वारा दो प्रमुख भागों में बाँटा है। यनीसी नदी का पश्चिमवर्ती भाग निम्नस्तरीय मैदान है, जिस पर अंशत: तृतीय कल्पिक अवशाय मिलते हैं और जो उत्तरी महासागर तल से मिल जाता है। यूराल पर्वत की ओर समुद्री जुरासिक, क्रिटेशस एवं पूर्वकालिक तृतीय कल्पिक चट्टानें मिलती हैं। यनीसी नदी का पूर्वी भाग बहुत अंशों में भिन्न है। इस भाग में पुराकल्पयुगीन चट्टानों का विकास महाद्वीपीय स्तर पर हुआ है। ये चट्टानें प्राय: क्षैतिज हैं तथा इनमें दो प्राचीन उद्वर्ग अनावर और येनीसे प्रमुख हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अंगारा प्रदेश (हिंदी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 8 फ़रवरी, 2014।

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