नारायणाश्रम  

नारायणाश्रम बदरीनाथ के निकट गंगा नदी के तट पर स्थित है।[1] इस स्थान का उल्लेख महाभारत में इस प्रकार हुआ है- 'तत्रापश्यत धर्मात्मा देवदेवर्षिपूजितम्, नरनारायणस्थ नै भागीरथ्योपशोभितम्'[2]

  • यह आश्रम यद्यपि अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है, तथापि महाभारत में इसे भागीरथी के तट पर स्थित बताया गया है।
  • भागीरथी और अलकनंदा यद्यपि गंगा की दो भिन्न शाखाएँ हैं, किन्तु यहाँ भागीरथी को अलकनंदा से अभिन्न माना गया है।
  • वास्तव में ये दो शाखाएँ ही देव प्रयाग में मिल कर गंगा कहलाती हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 493 |
  2. महाभारत, वनपर्व 145, 41.

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