अंजलिकाश्रम  

अंजलिकाश्रम नामक स्थान का विवरण पौराणिक महाकाव्य महाभारत के अनुशासन पर्व[1] में मिलता है। जो मनुष्य कोकामुख तीर्थ में स्नान करके अंजलिकाश्रम तीर्थ में जाकर साग का भोजन करता हुआ, चीरवस्त्र धारण करके कुछ काल तक निवास करता है, उसे दस बार कन्याकुमारी तीर्थ के सेवन का फल प्राप्त होता है तथा उसे कभी यमराज के घर नहीं जाना पड़ता।


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