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देव (कवि) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

देव (कवि)  

देव (कवि)
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पूरा नाम देवदत्ता
जन्म सन 1673 (संवत- 1730)
जन्म भूमि कुसमरा, इटावा
मृत्यु सन 1768 (संवत- 1825)
मुख्य रचनाएँ भाव-विलास, भवानी-विलास, कुशल-विलास, रस-विलास, प्रेम-चंद्रिका, सुजान-मणि, सुजान-विनोद, सुख-सागर
भाषा प्रवाहमय और साहित्यिक
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इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
देव की रचनाएँ

देव (जन्म- सन् 1673, इटावा - मृत्यु- सन् 1768) रीतिकालीन कवि थे। देव इटावा के रहने वाले सनाढय ब्राह्मण एवं मुग़ल कालीन कवि थे। कुछ लोगों ने इन्हें कान्यकुब्ज सिद्ध करने का भी प्रयत्न किया है। इनका पूरा नाम देवदत्ता था।

जीवन परिचय

'भावविलास' का रचना काल इन्होंने 1746 में दिया है और उस ग्रंथ निर्माण के समय इन्होंने अपनी अवस्था 16 ही वर्ष की बतलाई है। इस प्रकार से इनका जन्म संवत 1730 के आसपास का निश्चित होता है। इसके अतिरिक्त इनका और वृत्तांत कहीं प्राप्त नहीं होता। इन्हें कोई अच्छा उदार आश्रयदाता नहीं मिला जिसके यहाँ रहकर इन्होंने सुख से काल यापन किया हो। ये बराबर अनेक रईसों के यहाँ एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहे, पर कहीं जमे नहीं। इसका कारण या तो इनकी प्रकृति की विचित्रता रही या इनकी कविता के साथ उस काल की रुचि का असामंजस्य। देव ने अपने 'अष्टयाम' और 'भावविलास' को औरंगज़ेब के बड़े पुत्र 'आजमशाह' को सुनाया था जो हिन्दी कविता के प्रेमी थे। इसके बाद इन्होंने 'भवानीदत्ता वैश्य' के नाम पर 'भवानी विलास' और 'कुशलसिंह' के नाम पर 'कुशल विलास' की रचना की। इसके बाद 'मर्दनसिंह' के पुत्र 'राजा उद्योत सिंह वैश्य' के लिए 'प्रेम चंद्रिका' बनाई। इसके उपरांत यह लगातार अनेक प्रदेशों में घूमते रहे। इस यात्रा के अनुभवों का इन्होंने अपने 'जातिविलास' नामक ग्रंथ में उपयोग किया। इस ग्रंथ में देव ने भिन्न भिन्न जातियों और भिन्न भिन्न प्रदेशों की स्त्रियों का वर्णन किया है। इस प्रकार के वर्णन में उनकी विशेषताएँ अच्छी तरह व्यक्त हुई हों, ऐसा नहीं है। इतना घूमने के बाद इन्हें एक अच्छे आश्रयदाता 'राजा मोतीलाल' मिले, जिनके नाम पर संवत 1783 में इन्होंने 'रसविलास' नामक ग्रंथ बनाया। जिसमें इन्होंने 'राजा मोतीलाल' की बहुत प्रशंसा की है- मोतीलाल भूप लाख पोखर लेवैया जिन्ह लाखन खरचि रचि आखर ख़रीदे हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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