भीखा साहब  

भीखा साहब
भीखा साहब
पूरा नाम भीखानन्द चौबे
जन्म भूमि खानपुर बोहना, आजमगढ़ ज़िला, उत्तर प्रदेश
मृत्यु 1791 ई.
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'राम कुण्डलिया', 'राम सहस्रनाम', 'रामसबद', 'रामराग', 'राम कवित्त' और 'भगतवच्छावली' आदि।
भाषा भोजपुरी
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भीखा साहब ने पद, कवित्त, रेखता, कुण्डलिया और दोहा (साखी) आदि कई छन्दों का प्रयोग किया है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

भीखा साहब (भीखानन्द चौबे) बावरी पंथ की भुरकुडा, गाजीपुर शाखा के प्रसिद्ध संत गुलाम साहब के शिष्य थे। वे बड़े सिद्ध और अनुभवी संत थे। चमत्कारों और दिखावे में वे विश्वास नहीं करते थे। वे तो इतना जानते थे कि जो राम का भजन नहीं करता, उसे कालरूप समझना चाहिए-

'भीखा जेहि तन राम भजन नहिं कालरूप तेहि मानी।'

जन्म तथा गृह त्याग

भीखा साहब का जन्म आजमगढ़ ज़िला, उत्तर प्रदेश के खानपुर बोहना नामक ग्राम में हुआ था। उनको बचपन से ही गांव में आने वाले साधु-संत आकर्षित किया करते थे। धीरे-धीरे उनके मन में वैराग्य बढ़ने लगा। मात्र बारह साल की अवस्था में ही उनके विवाह की तैयारी की जाने लगी थी। विवाह के रंग- बिरंगे कपड़े पहनकर भीखा समझ गए कि उनके पैरों में गृहस्थ-धर्म की बेड़ियां डाली जा रही हैं। बस फिर क्या था, एक दिन वह चुपचाप घर से निकल भागे।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 हिन्दी साहित्य कोश, भाग 2 |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |संपादन: डॉ. धीरेंद्र वर्मा |पृष्ठ संख्या: 411 |
  2. सहायक ग्रंथ- उत्तरी भारत की संत परम्परा: परशुराम चतुर्वेदी; संतकाव्य; संतबानी संग्रह, भाग पहिला, बेलवेडियर प्रेस, प्रयाग।

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