अनीस  

अनीस हिन्दी के चिरपरिचित कवि हुए हैं।

  • 'सुनिए विटप हम पुहुप तिहारे', इस छन्द को ‘दिग्विजय भूषण’ में स्थान मिला है और ‘शिवराज सिंह सरोज’ में भी संभवत: वहीं से संकलित किया गया है।
  • मिश्र बंधुओं के अनुसार दलपत राय वंशीधर के काव्य शास्त्र ग्रंथ ‘अलंकार रत्नाकर’ में अनीस के अनेक छन्द संगृहित हैं। इस ग्रंथ की रचना 1751 ईस्वी में हुई है, अतः इससे पूर्व ही अनीस का समय माना जा सकता है। परंतु सरोजकार ने किस आधार पर इस कवि का उपस्थिति काल 1844 ई. माना है, यह कहना कठिन है।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी साहित्य कोश, भाग 2 |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |संपादन: डॉ. धीरेंद्र वर्मा |पृष्ठ संख्या: 15 |

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