गोविंदस्वामी  

गोविंदस्वामी
गोविंदस्वामी
पूरा नाम गोविंदस्वामी
जन्म संवत 1562 (1505 ई.) विक्रमी
जन्म भूमि आंतरी ग्राम, ब्रज
मृत्यु संवत 1642 (1585 ई.) विक्रमी
मृत्यु स्थान गोवर्धन में एक कन्‍दरा के निकट।
कर्म भूमि मथुरा
भाषा ब्रजभाषा
प्रसिद्धि अष्टछाप कवि
नागरिकता भारतीय
दीक्षा गुरु गोसाईं विट्ठलनाथ
स्मृति-स्थल कदमखण्‍डी
अन्य जानकारी गोविंददास सरस पदों की रचना करके श्रीनाथ जी की सेवा करते थे। ब्रज के प्रति उनका दृढ़ अनुराग और प्रगाढ़ आसक्ति थी। उन्‍होंने ब्रज की महिमा का बड़े सुन्‍दर ढंग से बखान किया है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

गोविंदस्वामी अंतरी के रहने वाले सनाढ्य ब्राह्मण थे। वे विरक्त की भाँति आकर ब्रजमण्डल के महावन में रहने लगे थे। बाद में वे विट्ठलनाथ जी के शिष्य हुए, जिन्होंने इनके रचे पदों से प्रसन्न होकर इन्हें 'अष्टछाप' में लिया और फिर 'गोविंददास' नाम दिया। ये एक कवि होने के अतिरिक्त बड़े पक्के गवैया भी थे। तानसेन कभी-कभी इनका गाना सुनने के लिए आया करते थे।

परिचय

गोविंदस्वामी जी का जन्म ब्रज के निकट आंतरी नामक ग्राम में संवत 1562 (1505 ई.) विक्रमी में हुआ था। बाल्‍यावस्‍था से ही उनमें वैराग्‍य और भक्ति के अंकुर प्रस्‍फुटित हो रहे थे। कुछ दिनों तक गृहस्‍थाश्रम का उपभोग करने पर उन्‍होंने घर छोड़ दिया और वैराग्‍य ले लिया। महावन में जाकर भगवान के भजन और कीर्तन में समय का सदुपयोग करने लगे। महावन के टीले पर बैठकर शास्‍त्रोक्‍त विधि से वे कीर्तन करते थे। धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गयी।

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