पृथ्वीराज  

Disamb2.jpg पृथ्वीराज एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- पृथ्वीराज (बहुविकल्पी)

पृथ्वीराज वीर रस के अच्छे कवि थे और बीकानेर नरेश राजसिंह के भाई। ये बादशाह अकबर के दरबार में रहते थे।[1]

परिचय

पृथ्वीराज मेवाड़ की स्वतंत्रता तथा राजपूतों की मर्यादा की रक्षा के लिये सतत संघर्ष करने वाले महाराणा प्रताप के अनन्य समर्थक और प्रशंसक थे।

पृथ्वीराज की पहली रानी लालादे बड़ी ही गुणवती पत्नी थी। वह भी कविता करती थी। युवास्था में ही उसकी मृत्यु हो गई, जिससे पृथ्वीराज को बड़ा सदमा बैठा। उसके शव को चिता पर जलते देखकर वे चीत्कार कर उठे-

तो राँघ्यो नहिं खावस्याँ, रे वासदे निसड्ड। मो देखत तू बालिया, साल रहंदा हड्ड।

अर्थात- "हे निष्ठुर अग्नि, मैं तेरा राँघा हुआ भोजन न ग्रहण करुँगा, क्योंकि तूने मेरे देखते-देखते लालादे को जला डाला और उसका हाड़ ही शेष रह गया।"

बाद में स्वास्थ्य खराब होता देखकर संबंधियों ने जैसलमेर के राव की पुत्री चंपादे से पृथ्वीराज का विवाह करा दिया। चंपादे भी कविता करती थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 477 |

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