दयाराम  

दयाराम
दयाराम
पूरा नाम दयाराम
अन्य नाम दयाशंकर, दयासखी
जन्म 1767 ई.
जन्म भूमि चांदोद ग्राम, गुजरात
मृत्यु 1852 ई.
अभिभावक प्रभुराम नागर
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र कृष्ण भक्ति-काव्य
मुख्य रचनाएँ 'वल्लभ नो परिवार', 'चौरासी वैष्णवमनु ढोला', 'पुष्टिपथ रहस्य', 'भक्ति-पोषण', 'रसिकवल्लभ', 'नीतिभक्ति ना पदो' तथा 'सतसैया'।
भाषा गुजराती
प्रसिद्धि वैष्णव कवि
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी बड़ौदा के धनिक गोपालदास की ओर से प्राप्त 'गणपतिवंदना' के प्रस्ताव को दयाराम ने 'एक वयों गोपीजनवल्लभ, नहिं स्वामी बीजो रे' लिखकर वापस कर दिया था, जो कृष्ण के प्रति उनके अनन्य भाव का परिचायक है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

दयाराम (अंग्रेज़ी: Dayaram, जन्म- 1767 ई., गुजरात; मृत्यु- 1852 ई.) मध्यकालीन गुजराती भक्ति-काव्य परंपरा के अंतिम महत्वपूर्ण वैष्णव कवि थे। उनके अवसान के साथ मध्य काल और कृष्ण भक्ति-काव्य दोनों का पर्यवसान हो गया। इस युग परिवर्तन के चिह्न कुछ-कुछ दयाराम के काव्य में ही लक्षित होते हैं।

जन्म

दयाराम जी का जन्म 1767 ई. में नर्मदा नदी के तटवर्ती साठोदरा के चांदोद नामक ग्राम में प्रभुराम नागर के घर हुआ था। बाल्यकाल में ही अनाथ हो जाने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन अस्त-व्यस्ता में बीता। पहले वे केशवानंद संन्यासी के शिष्य हुए, फिर इच्छाराम भट्ट के, जो 'पुष्टिमार्गीय वैष्णव' थे।[1]

ब्रजयात्रा

दयाराम ने अनेक बार तीर्थयात्रा के उद्देश्य से भारत भ्रमण किया। मथुरा वृंदावन की कृष्णभक्ति तथा 'अष्टछाप के कवियों' के ब्रज साहित्य ने उन्हें विशेष आकर्षित किया। ब्रज में ही उन्होंने 'वल्लभ संप्रदाय' के तत्कालीन गोस्वामी श्री वल्लभलाल जी से दीक्षा ग्रहण की तथा आजीवन पुष्टिमार्गीय बने रहे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 दयाराम (हिंदी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 19 सितम्बर, 2015।

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