वियोगी हरि  

वियोगी हरि
वियोगी हरि
पूरा नाम वियोगी हरि
जन्म 1896
जन्म भूमि छतरपुर
मृत्यु 1988
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ 'साहित्य विहार', 'वीर सतसई', 'विश्वधर्म', 'छत्रसाल ग्रंथावली', 'अनुरागवाटिका', 'मेवाड़ केसरी', 'संतवाणी', 'प्रेमपरिषद' आदि।
भाषा हिन्दी
पुरस्कार-उपाधि 'मंगलाप्रसाद पारितोषिक'
प्रसिद्धि साहित्यकार, कवि, गाँधीवादी समाजसेवी
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी वियोगी हरि 1932 से साहित्य साधना से विरत होकर 'हरिजन सेवक संघ', 'दिल्ली गांधी स्मारक निधि' एवं 'भूदान आन्दोलन' का कार्य करते रहे।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

वियोगी हरि (अंग्रेज़ी: Viyogi Hari , जन्म- 1896, छतरपुर; मृत्यु- 1988) हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे आधुनिक ब्रजभाषा के प्रमुख कवि, हिन्दी के सफल गद्यकार, गाँधीवादी और एक समाज सेवी संत थे। उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण कृति 'वीर-सतसई' थी, जिसके लिए इन्हें 'मंगलाप्रसाद पारितोषिक' प्रदान किया गया था। वियोगी हरि ने अनेक ग्रंथों का संपादन, प्राचीन कविताओं का संग्रह तथा संतों की वाणियों को संकलित किया था। निबन्ध, नाटक, कविता, गद्यगीत तथा बालोपयोगी पुस्तकें भी उन्होंने लिखी थीं।

जन्म तथा शिक्षा

वियोगी हरि का जन्म वर्ष 1896 ई. में छतरपुर राज्य के एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण इनका पालन-पोषण एवं शिक्षा ननिहाल में घर पर ही हुई। शिक्षा आदि के कार्य में वियोगी हरि प्रारम्भ से ही मेधावी रहे थे। इनकी हिन्दी और संस्कृत की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। मैट्रिकुलेशन की परीक्षा इन्होंने 1915 में छतरपुर के हाईस्कूल से उत्तीर्ण की। वियोगी हरि की किशोरावस्था से ही दर्शनशास्त्र में विशेष अभिरुचि थी। छतरपुर की महारानी कमलकुमारी 'युगलप्रिया' के स्नेह-सिक्त सम्पर्क से उनके साथ भारत के प्रसिद्ध तीर्थों का इन्होंने भ्रमण किया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 हिन्दी साहित्य कोश, भाग 2 |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |संपादन: डॉ. धीरेंद्र वर्मा |पृष्ठ संख्या: 570 |

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