गोकुलनाथ  

Disamb2.jpg गोकुलनाथ एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- गोकुलनाथ (बहुविकल्पी)

गोकुलनाथ काशी (वर्तमान बनारस) के दरबारी कवि थे। ये महाराज चेतसिंह और उदित नारायण सिंह के प्रसिद्ध दरबारी कवि थे। इनकी प्रमुख रचनाओं में- 'चेतसिंह चन्द्रिका', 'राधाकृष्ण विलास', 'राधानखशिख', 'महाभारत दर्पण' आदि प्रमुख है। ‘महाभारत दर्पण' क़रीब 54 वर्षों बाद सन 1884 में इनके शिष्य 'मणिदेव' तथा पुत्र 'गोपीनाथ' के सहयोग से लिखी गई थी।[1]

परिचय

गोकुलनाथ और गोपीनाथ प्रसिद्ध कवि रघुनाथ बंदीजन के क्रमश: पुत्र और पौत्र थे। गोकुलनाथ, गोपीनाथ और मणिदेव, इन तीनों महानुभावों ने मिलकर हिन्दी साहित्य में बड़ा भारी काम किया है। इन्होंने समग्र 'महाभारत' और 'हरिवंश'[2] का अनुवाद अत्यंत मनोहर विविधा छंदों में पूर्ण कवित्त के साथ किया है। इनकी भाषा प्रांजल और सुव्यवस्थित है।

इनकी रचनाओं में अनुप्रास का अधिक आग्रह न होने पर भी आवश्यक विधान है। रचना सब प्रकार से साहित्यिक और मनोहर है और लेखकों की काव्य कुशलता का परिचय देती है। 'महाभारत' और 'हरिवंश' के परिशिष्ट ग्रंथ बनने में भी पचास वर्ष से ऊपर लगे हैं। अनुमानत: इसका आरंभ संवत् 1830 में हो चुका था और संवत् 1884 में जाकर समाप्त हुआ है। इसकी रचना काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह की आज्ञा से हुई, जिन्होंने इसके लिए लाखों रुपये व्यय किए थे। इस बड़े भारी साहित्यिक यज्ञ के अनुष्ठान के लिए हिन्दी प्रेमी उक्त महाराज के सदा कृतज्ञ रहेंगे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. काशी कथा, साहित्यकार (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 10 जनवरी, 2014।
  2. जो महाभारत का ही परिशिष्ट माना जाता है

आचार्य, रामचंद्र शुक्ल “प्रकरण 3”, हिन्दी साहित्य का इतिहास (हिन्दी)। भारतडिस्कवरी पुस्तकालय: कमल प्रकाशन, नई दिल्ली, पृष्ठ सं. 253।

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=गोकुलनाथ&oldid=511082" से लिया गया