सुब्रह्मण्य भारती  

सुब्रह्मण्य भारती
सुब्रह्मण्य भारती
पूरा नाम सुब्रह्मण्य भारती
अन्य नाम महाकवि भरतियार
जन्म 11 दिसम्बर, 1882
जन्म भूमि गाँव एट्टियपुरम, तमिलनाडु
मृत्यु 11 सितम्बर, 1921
मृत्यु स्थान चेन्नई
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र तमिल काव्य
मुख्य रचनाएँ 'स्वदेश मित्रम', 'चक्रवर्तिनी', 'इण्डिया', 'सूर्योदयम', 'कर्मयोगी' आदि।
भाषा तमिल
नागरिकता भारतीय
विशेष सुब्रह्मण्य भारती का प्रिय गान बंकिम चन्द्र का वन्दे मातरम् था। यह गान उनका जीवन प्राण बन गया था। उन्होंने इस गीत का उसी लय में तमिल में पद्यानुवाद किया, जो आगे चलकर तमिलनाडु के घर-घर में गूँज उठा।
अन्य जानकारी सुब्रह्मण्य भारती ने माता-पिता को खोने के दु:ख को अपने काव्य में ढाल लिया। इससे उनकी ख्याति चारों ओर फैल गयी। स्थानीय सामन्त के दरबार में उनका सम्मान हुआ और उन्हें ‘भारती’ की उपाधि दी गयी।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

सुब्रह्मण्य भारती (अंग्रेज़ी: Subramania Bharati, जन्म: 11 दिसम्बर, 1882 - मृत्यु: 11 सितम्बर, 1921) भारत के महान् कवियों में से एक थे, जिन्होंने तमिल भाषा में काव्य रचनाएँ कीं। इन्हें महाकवि भरतियार के नाम से भी जाना जाता है। भारती एक जुझारू शिक्षक, देशप्रेमी और महान् कवि थे। आपकी देश प्रेम की कविताएँ इतनी श्रेष्ठ हैं कि आपको भारती उपनाम से ही पुकारा जाने लगा। तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती ऐसे साहित्यकार थे, जो सक्रिय रूप से 'स्वतंत्रता आंदोलन' में शामिल रहे, जबकि उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर दक्षिण भारत में आम लोग आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े। ये ऐसे महान् कवियों में से एक थे, जिनकी पकड़ हिंदी, बंगाली, संस्कृत, अंग्रेज़ी आदि कई भाषाओं पर थी, पर तमिल उनके लिए सबसे प्रिय और मीठी भाषा थी। उनका 'गद्य' और 'पद्य' दोनों विधाओं पर समान अधिकार था।

परिचय

सुब्रह्मण्य भारती का जन्म 11 दिसंबर, 1882 को एक तमिल गाँव एट्टियपुरम, तमिलनाडु में हुआ था। शुरू से ही वह विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और कम समय में ही उन्होंने संगीत का भी अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया था। 11 वर्ष की आयु में उन्हें कवियों के एक सम्मेलन में आमंत्रित किया गया, जहाँ उनकी प्रतिभा को देखते हुए भारती को ज्ञान की देवी सरस्वती का ख़िताब दिया गया था। भारती जब पाँच वर्ष के ही थे, तभी उनकी माता का निधन हो गया। बाद में पिता का निधन भी जल्दी हो गया। 11 वर्ष की ही अल्प अवस्था में उनका विवाह कर दिया गया। वह कम उम्र में ही वाराणसी अपनी बुआ के पास आ गए थे, जहाँ उनका परिचय अध्यात्म और राष्ट्रवाद से हुआ। इसका उनके जीवन पर काफ़ी प्रभाव पड़ा और उनकी सोच में काफ़ी बदलाव आ गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सुब्रह्मण्य भारती (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 6 फरवरी, 2014।
  2. तमिल काव्य में राष्ट्रवादी स्वर : सुब्रह्मण्य भारती (हिंदी) हर दिन पावन। अभिगमन तिथि: 6 फरवरी, 2014।
  3. स्वाधीनता आन्दोलन और स्वामी विवेकानंद (हिंदी) विचार मंथन। अभिगमन तिथि: 6 फरवरी, 2014।
  4. तमिल काव्य में राष्ट्रवादी स्वर : सुब्रह्मण्य भारती (हिंदी) हर दिन पावन। अभिगमन तिथि: 6 फरवरी, 2014।

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