गजानन माधव 'मुक्तिबोध'  

गजानन माधव 'मुक्तिबोध'
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पूरा नाम गजानन माधव मुक्तिबोध
अन्य नाम मुक्तिबोध
जन्म 13 नवंबर 1917
जन्म भूमि श्यौपुर (ग्वालियर)
मृत्यु 11 सितंबर 1964 (आयु- 46 वर्ष)
मृत्यु स्थान दिल्ली
अभिभावक श्री माधव मुक्तिबोध (पिता)
पति/पत्नी श्रीमती शांता मुक्तिबोध
कर्म-क्षेत्र कवि, लेखक, समीक्षक
मुख्य रचनाएँ कविता संग्रह- चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी भूरी खाक धूल कहानी संग्रह- काठ का सपना, विपात्र, सतह से उठता आदमी आलोचना- कामायनी : एक पुनर्विचार, नई कविता का आत्मसंघर्ष, नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, समीक्षा की समस्याएँ, एक साहित्यिक की डायरी रचनावली- मुक्तिबोध रचनावली (6 खंडों में)
भाषा हिन्दी
विद्यालय नागपुर विश्वविद्यालय
शिक्षा एम. ए.
प्रसिद्धि प्रगतिशील कवि
नागरिकता भारतीय
विधाएँ कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, आलोचना
अन्य जानकारी हिन्दी साहित्य में सर्वाधिक चर्चा के केन्द्र में रहने वाले मुक्तिबोध कहानीकार भी थे और समीक्षक भी। उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
गजानन माधव मुक्तिबोध की रचनाएँ
गजानन माधव 'मुक्तिबोध' (अंग्रेज़ी: Gajanan Madhav Muktibodh, जन्म: 13 नवंबर, 1917 - मृत्यु: 11 सितंबर, 1964) की प्रसिद्धि प्रगतिशील कवि के रूप में है। मुक्तिबोध हिन्दी साहित्य की स्वातंत्र्योत्तर प्रगतिशील काव्यधारा के शीर्ष व्यक्तित्व थे। हिन्दी साहित्य में सर्वाधिक चर्चा के केन्द्र में रहने वाले मुक्तिबोध कहानीकार भी थे और समीक्षक भी। उन्हें प्रगतिशील कविता और नयी कविता के बीच का एक सेतु भी माना जाता है।
मुक्तिबोध हिन्दी संसार की एक घटना बन गए। कुछ ऐसी घटना जिसकी ओर से आँखें मूंद लेना असम्भव था। उनका एकनिष्ठ संघर्ष, उनकी अटूट सच्चाई, उनका पूरा जीवन, सभी एक साथ हमारी भावनाओं के केंद्रीय मंच पर सामने आए और सभी ने उनके कवि होने को नई दृष्टि से देखा। कैसा जीवन था वह और ऐसे उसका अंत क्यों हुआ। और वह समुचित ख्याति से अब तक वंचित क्यों रहा? यह तल्ख टिप्पणी शमशेर बहादुर सिंह की है जो उन्होंने बड़े बेबाक ढंग से हिंदी जगत् के साहित्यकारों की निस्संगता पर कही है।[1]

जन्म और शिक्षा

गजानन माधव 'मुक्तिबोध' का जन्म 13 नवंबर, 1917 को श्यौपुर (ग्वालियर) में हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा उज्जैन में हुई। मुक्तिबोध जी के पिता पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर थे और उनका तबादला प्रायः होता रहता था। इसीलिए मुक्तिबोध जी की पढ़ाई में बाधा पड़ती रहती थी। इन्दौर के होल्कर से सन् 1938 में बी.ए. करके उज्जैन के माडर्न स्कूल में अध्यापक हो गए।[2] इनका एक सहपाठी था शान्ताराम, जो गश्त की ड्यूटी पर तैनात हो गया था। गजानन उसी के साथ रात को शहर की घुमक्कड़ी को निकल जाते। बीड़ी का चस्का शायद तभी से लगा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 मुक्तिबोध की कविता- मध्यवर्गीय संघर्ष और विषमताओं की ताकत का आख्यान (हिन्दी) फाल्गुन विश्व। अभिगमन तिथि: 23 दिसम्बर, 2014।
  2. हिन्दीकुंज (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) हिन्दी कुँज। अभिगमन तिथि: 12 नवंबर, 2010
  3. गजानन माधव मुक्तिबोध (हिंदी) हिन्दी समय। अभिगमन तिथि: 26 अक्टूबर, 2014।
  4. 4.0 4.1 मुक्तिबोध (हिंदी) सहपीडिया। अभिगमन तिथि: 27 अक्टूबर, 2014।
  5. वाजपेयी, अशोक। मुक्तिबोधः 'एक गोत्रहीन कवि' (हिन्दी) बीबीसी हिन्दी। अभिगमन तिथि: 25 दिसम्बर, 2014।
  6. गजानन माधव मुक्तिबोध जहां रहते थे... (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) अमर उजाला। अभिगमन तिथि: 26 अक्टूबर, 2014।

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