कन्हैयालाल सेठिया  

कन्हैयालाल सेठिया
कन्हैयालाल सेठिया
पूरा नाम कन्हैयालाल सेठिया
जन्म 11 सितम्बर, 1919
जन्म भूमि सुजानगढ़, चुरू, राजस्थान
मृत्यु 11 नवम्बर, 2008
अभिभावक छगनमलजी सेठिया तथा मनोहरी देवी
संतान दो पुत्र- जयप्रकाश, विनयप्रकाश; एक पुत्री- सम्पत देवी दूगड़
कर्म भूमि भारत
मुख्य रचनाएँ रमणियां रा सोरठा, लीलटांस, वनफूल, अग्णिवीणा, मेरा युग, खुली खिड़कियां चौड़े रास्ते, 'पाथल व पीथल' आदि।
भाषा हिन्दी, राजस्थानी, उर्दू
विद्यालय राजस्थान विश्वविद्यालय
शिक्षा बी.ए.
पुरस्कार-उपाधि 'पद्म श्री', 'डॉ. तेस्सीतोरी स्मृति स्वर्ण पदक', 'सूर्यमल मिश्रण शिखर पुरस्कार', 'पृथ्वीराज राठौड़ पुरस्कार', 'मूर्तिदेवी साहित्य पुरस्कार' आदि।
प्रसिद्धि कवि तथा लेखक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 1942 में जब महात्मा गाँधी ने ‘करो या मरो’ का आह्वान किया, तब कन्हैयालाल जी की ‘अग्निवीणा’ प्रकाशित हुई, जिस पर बीकानेर राज्य में इन पर राजद्रोह का मुक़दमा चला और बाद में राजस्थान सरकार ने इनको स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी के रूप में सम्मानित भी किया।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

कन्हैयालाल सेठिया (अंग्रेज़ी: Kanhaiyalal Sethia ; जन्म- 11 सितम्बर, 1919, चुरू, राजस्थान; मृत्यु- 11 नवम्बर, 2008) आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिन्दीराजस्थानी लेखक थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य रचना 'पाथल व पीथल' है।[1] राजस्थान में सामंतवाद के ख़िलाफ़ इन्होंने जबरदस्त मुहिम चलायी थी और पिछड़े वर्ग को आगे लाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक तथा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कवि एवं लेखक के रूप में कन्हैयालाल सेठिया को अनेक सम्मान, पुरस्कार एवं अलंकरण प्राप्त हुए थे। भारत सरकार द्वारा इन्हें 'पद्म श्री' से भी सम्मानित किया जा चुका है।

जन्म तथा शिक्षा

कन्हैयालाल सेठिया का जन्म 11 सितम्बर, 1919 को राजस्थान के चुरू ज़िले में सुजानगढ़ नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम छगनमलजी सेठिया था तथा माता मनोहरी देवी थीं। कन्हैयालाल जी की प्रारम्भिक पढ़ाई कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में हुई। स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ने के कारण कुछ समय के लिए इनकी शिक्षा बाधित भी हुई, लेकिन बाद में इन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.ए. स्नातक की उपाधि प्राप्त की। दर्शन, राजनीति और साहित्य इनके प्रिय विषय थे।

विवाह

वर्ष 1937 में कन्हैयालाल सेठिया जी का विवाह धापू देवी के साथ हुआ। इनके दो पुत्र- जयप्रकाश तथा विनयप्रकाश और एक पुत्री सम्पत देवी दूगड़ हैं।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 'पाथल' राणा प्रताप को व 'पीथल' पृथ्वीराज राठौड़ को कहा गया है
  2. 2.0 2.1 कन्हैयालाल सेठिया (हिन्दी) एकता प्रकाशन। अभिगमन तिथि: 05 अगस्त, 2014।
  3. कन्हैयालाल सेठिया/परिचय (हिन्दी) कविता कोश। अभिगमन तिथि: 05 अगस्त, 2014।
  4. महाकवि का महाप्रयाण: पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया नहीं रहे (हिन्दी) कथा व्यथा। अभिगमन तिथि: 05 अगस्त, 2014।
  5. एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि राजस्थानी भाषा के कार्य में लगाने हेतु फाउन्डेशन को लौटा दी, जिसे फाउन्डेशन ने राजस्थान परिषद को इस हेतु समर्पित किया।

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