औरंगज़ेब  

औरंगज़ेब
औरंगज़ेब
पूरा नाम अब्दुल मुज़फ़्फ़र मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब बहादुर आलमगीर पादशाह गाज़ी
अन्य नाम औरंगज़ेब आलमगीर
जन्म 4 नवम्बर, सन् 1618 ई.
जन्म भूमि दोहद (गुजरात)
मृत्यु तिथि 3 मार्च, सन् 1707 ई.
मृत्यु स्थान अहमदनगर के पास
पिता/माता शाहजहाँ, मुमताज़ महल
पति/पत्नी रबिया दुर्रानी
संतान पुत्री- जेबुन्निसा, पुत्र- सुल्तान मुहम्मद, शाहजादा मुअज्ज़म, शाहजादा आज़म, शाहजादा अकबर, कामबख्श
उपाधि औरंगज़ेब आलमगीर
राज्य सीमा उत्तर और मध्य भारत
शासन काल 31 जुलाई, सन् 1658 से 3 मार्च, सन् 1707 तक
शा. अवधि 49 वर्ष
राज्याभिषेक 15 जून, सन् 1659 ई. में लाल क़िला, दिल्ली
निर्माण लाहौर की बादशाही मस्जिद 1674 ई. में, बीबी का मक़बरा, औरंगाबाद[1], मोती मस्जिद [2]
पूर्वाधिकारी शाहजहाँ
उत्तराधिकारी बहादुर शाह प्रथम
राजघराना मुग़ल
मक़बरा खुल्दाबाद
संबंधित लेख मुग़ल काल
भाषा ज्ञान अरबी, फ़ारसी, तुर्की

मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब (अंग्रेज़ी: Muhi-ud-Din Aurangzeb, जन्म- 4 नवम्बर, 1618, गुजरात; मृत्यु- 3 मार्च, 1707, अहमदनगर) छठा मुग़ल बादशाह था, जिसने भारत पर शासन किया। उसने 1658 से 1707 ई. (अपनी मृत्यु तक) मुग़ल साम्राज्य पर शासन किया। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक राज्य किया। वह अकबर के बाद सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था। अपने जीवन काल में उसने दक्षिण भारत में मुग़ल साम्राज्य का विस्तार करने का भरसक प्रयास किया, पर उसकी मृत्यु के पश्चात मुग़ल साम्राज्य सिकुड़ने लगा। औरंगज़ेब के शासन में मुग़ल साम्राज्य अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष पर था। वह अपने समय का शायद सबसे धनी और शातिशाली व्यक्ति था, जिसने अपने जीवन काल में दक्षिण भारत में प्राप्त विजयों के जरिये मुग़ल साम्राज्य को साढ़े बारह लाख वर्ग मील में फैलाया और 15 करोड़ लोगों पर शासन किया, जो की दुनिया की आबादी का 1/4 था। ग़ैर मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वह पहला मुसलमान शासक था।

परिचय

औरंगज़ेब का जन्म 4 नवम्बर, 1618 ई. में गुजरात के ‘दोहद’ नामक स्थान पर मुमताज़ के गर्भ से हुआ था। औरंगज़ेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहाँ के पास बीता था। 1643 ई. में औरंगज़ेब को 10,000 जात एवं 4000 सवार का मनसब प्राप्त हुआ। ‘ओरछा’ के जूझर सिंह के विरुद्ध औरंगज़ेब को प्रथम युद्ध का अनुभव प्राप्त हुआ था। 18 मई, 1637 ई. को फ़ारस के राजघराने की 'दिलरास बानो बेगम' के साथ औरंगज़ेब का निकाह हुआ। 1636 ई. से 1644 ई. एवं 1652 ई. से 1657 ई. तक औरंगज़ेब गुजरात (1645 ई.), मुल्तान (1640 ई.) एवं सिंध का भी गर्वनर रहा। आगरा पर क़ब्ज़ा कर जल्दबाज़ी में औरंगज़ेब ने अपना राज्याभिषक "अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुजफ्फर औरंगज़ेब बहादुर आलमगीर" की उपाधि से 31 जुलाई, 1658 ई. को दिल्ली में करवाया। ‘खजुवा’ एवं ‘देवराई’ के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई, 1659 ई. को औरंगज़ेब ने दिल्ली में प्रवेश किया, जहाँ शाहजहाँ के शानदार महल में जून, 1659 ई. को औरंगज़ेब का दूसरी बार राज्याभिषेक हुआ। औरंगज़ेब के सिंहासनारूढ़ होने पर फ़ारस के शाह ने मैत्री स्वरूप बुदाग़ बेग के नेतृत्व में एक दूत मण्डल भेजा था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1678 ई. पत्नी रबिया दुर्रानी की स्मृति में
  2. दिल्ली के लाल क़िले में
  3. सरकार, जदुनाथ “खण्ड 5”, हिस्ट्री ऑफ औरंगजेब (हिन्दी), पृष्ठ सं. 264।

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