रामलीला  

रामलीला
रावण वध करते हुए राम, रामलीला, मथुरा
विवरण 'रामलीला' उत्तरी भारत में परम्परागत रूप से खेला जाने वाला राम के चरित पर आधारित नाटक है। यह प्रायः विजय दशमी के अवसर पर खेला जाता है।
मुख्य पात्र राम, सीता, लक्ष्मण, रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण, भरत, शत्रुघ्न
आयोजन तिथि सितंबर और अक्टूबर माह में दशहरा पर्व के दौरान
मुख्य लीला स्थल (नगर) अयोध्या, बनारस, मथुरा, वृंदावन (सभी उत्तर प्रदेश), दिल्ली, अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) और मधुबनी (बिहार)
संबंधित लेख रामचरितमानस, विजय दशमी, रासलीला
अन्य जानकारी लोक नाट्य के रूप में प्रचलित इस रामलीला का देश के विविध प्रान्तों में अलग अलग तरीक़ों से मंचन किया जाता है।

रामलीला उत्तरी भारत में परम्परागत रूप से खेला जाने वाला राम के चरित पर आधारित नाटक है। यह प्रायः विजयादशमी के अवसर पर खेला जाता है। दशहरा उत्सव में रामलीला भी महत्वपूर्ण है। रामलीला में राम, सीता और लक्ष्मण की जीवन का वृत्तांत का वर्णन किया जाता है। रामलीला नाटक का मंचन देश के विभिन्न क्षेत्रों में होता है। यह देश में अलग-अलग तरीक़े से मनाया जाता है। बंगाल और मध्य भारत के अलावा दशहरा पर्व देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय विषमता के बावजूद एक समान उत्साह और शौक़ से मनाया जाता है।

इतिहास

समुद्र से लेकर हिमालय तक प्रख्यात रामलीला का आदि प्रवर्तक कौन है, यह विवादास्पद प्रश्न है। भावुक भक्तों की दृष्टि में यह अनादि है। एक किंवदंती का संकेत है कि त्रेता युग में श्रीरामचंद्र के वनगमनोपरांत अयोध्यावासियों ने 14 वर्ष की वियोगावधि राम की बाल लीलाओं का अभिनय कर बिताई थी। तभी से इसकी परंपरा का प्रचलन हुआ। एक अन्य जनश्रुति से यह प्रमाणित होता है कि इसके आदि प्रवर्तक मेघा भगत थे जो काशी के कतुआपुर मुहल्ले में स्थित फुटहे हनुमान के निकट के निवासी माने जाते हैं।
दशानन रावण, रामलीला, मथुरा
एक बार पुरुषोत्तम रामचंद्र जी ने इन्हें स्वप्न में दर्शन देकर लीला करने का आदेश दिया ताकि भक्त जनों को भगवान् के चाक्षुष दर्शन हो सकें। इससे सत्प्रेरणा पाकर इन्होंने रामलीला संपन्न कराई। तत्परिणामस्वरूप ठीक भरत मिलाप के मंगल अवसर पर आराध्य देव ने अपनी झलक देकर इनकी कामना पूर्ण की। कुछ लोगों के मतानुसार रामलीला की अभिनय परंपरा के प्रतिष्ठापक गोस्वामी तुलसीदास हैं, इन्होंने हिंदी में जन मनोरंजनकारी नाटकों का अभाव पाकर इसका श्रीगणेश किया। इनकी प्रेरणा से अयोध्या और काशी के तुलसी घाट पर प्रथम बार रामलीला हुई थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. रामलीला: कितने रंग, कितने रूप (हिंदी) ignca। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2013।
  2. अवस्थी, डॉ. इंदुजा। रामलीला परंपरा और शैलियाँ (शोधग्रंथ) (हिंदी) अभिव्यक्ति। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2013।
  3. तिवारी, चन्द्र शेखर। उत्तराखण्ड की एक विरासत है कुमाऊंनी रामलीला (हिंदी) मेरा पहाड़। अभिगमन तिथि: 5 अक्टूबर, 2013।

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