सुरसा  

सुरसा
सुरसा के मुख में प्रवेश करते हनुमान
विवरण 'सुरसा' रामायण के अनुसार समुद्र में रहने वाली नागमाता थी। सीता की खोज में गये हनुमान का रास्ता सुरसा ने रोका था और उन्हें खाने को उद्यृत हुई।
सन्दर्भ ग्रंथ रामायण
विशेष स्वर्ग के देवताओं ने हनुमान की बल-बुद्धि आदि की विशेष परीक्षा लेने के लिए ही नागमाता सुरसा को भेजा था।
संबंधित लेख हनुमान, रामायण
अद्यतन‎ सुरसा हनुमान को निगलने के लिए जैसे-जैसे अपने मुख का आकार बढ़ाती जाती, वैसे ही हनुमान भी अपना आकार दुगुना करते जाते थे।

सुरसा रामायण के अनुसार समुद्र में रहने वाली नागमाता थी। सीताजी की खोज में समुद्र पार करने के समय सुरसा ने राक्षसी का रूप धारण कर हनुमान का रास्ता रोका था और उन्हें खा जाने के लिए उद्धत हुई थी। समझाने पर जब वह नहीं मानी, तब हनुमान ने अपना शरीर उससे भी बड़ा कर लिया। जैसे-जैसे सुरसा अपना मुँह बढ़ाती जाती, वैसे-वैसे हनुमान शरीर बढ़ाते जाते। बाद में हनुमान ने अचानक ही अपना शरीर बहुत छोटा कर लिया और सुरसा के मुँह में प्रवेश करके तुरंत ही बाहर निकल आये। सुरसा ने प्रसन्न होकर हनुमान को आशीर्वाद दिया तथा उनकी सफलता की कामना की।[1]

मैनाक का आग्रह

श्रीराम के भक्त हनुमान को आकाश में बिना विश्राम लिए लगातार उड़ते देख कर समुद्र ने सोचा कि यह प्रभु श्रीराम जी का कार्य पूरा करने के लिए जा रहे हैं। किसी प्रकार थोड़ी देर के लिए विश्राम दिलाकर इनकी थकान दूर करनी चाहिए। अत: समुद्र ने अपने जल के भीतर रहने वाले मैनाक पर्वत से कहा- "मैनाक! तुम थोड़ी देर के लिए ऊपर उठ कर अपनी चोटी पर हनुमान को बिठा कर उनकी थकान दूर करो।" समुद्र का आदेश पाकर मैनाक प्रसन्न होकर हनुमान जी को विश्राम देने के लिए तुरन्त उनके पास आ पहुँचा। उसने उनसे अपनी सुंदर चोटी पर विश्राम के लिए निवेदन किया। उसकी बातें सुनकर हनुमान ने कहा- "मैनाक! तुम्हारा कहना ठीक है, लेकिन भगवान श्रीरामचंद्र जी का कार्य पूरा किए बिना मेरे लिए विश्राम करने का कोई प्रश्र ही नहीं उठता।" ऐसा कह कर उन्होंने मैनाक को हाथ से छूकर प्रणाम किया और आगे चल दिए।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड, 1|1 से 2.

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