शूर्पणखा  

लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काटते हुए

शूर्पणखा एक प्रसिद्ध पौराणिक चरित्र है, जो लंका के राजा रावण की बहन थी। शूर्पवत् नखानि यस्या सा शूर्पणखा अर्थात- "जिसके नख सूप के समान हों।" 'रामायण', 'रामचरितमानस', 'रामचन्द्रिका', 'साकेत', 'साकेत सन्त', पंचवटी' आदि रामकथा- सम्बन्धी काव्य-ग्रन्थों में शूर्पणखा का प्रसंग वर्णित हुआ है।

रामायण के अनुसार

शूर्पणखा लंका के राजा रावण की बहन तथा दानवों के राजा कालका के पुत्र विद्युज्जिह्व की पत्नी थी। समस्त संसार पर विजय प्राप्त करने की इच्छा से रावण ने अनेक युद्ध किये, अनेक दैत्यों को मारा। उन्हीं दैत्यों में विद्युज्जिह्व भी मारा गया। शूर्पणखा बहुत दु:खी हुई। रावण ने उसे आश्वस्त करते हुए अपने भाई खर के पास रहने के लिए भेज दिया। वह दंडकारण्य में रहने लगी।

राम पर आसक्त

एक बार राम और सीता कुटिया में बैठे थे। अचानक शूर्पणखा[1] ने वहां प्रवेश किया। वह राम को देखकर मुग्ध हो गयी तथा उनका परिचय जानकर उसने अपने विषय में इस प्रकार बतलाया- "मैं इस प्रदेश में स्वेच्छाचारिणी राक्षसी हूं। मुझसे सब भयभीत रहते हैं। विश्रवा का पुत्र बलवान रावण मेरा भाई है। मैं तुमसे विवाह करना चाहती हूं।" राम ने उसे बतलाया कि- "उनका विवाह हो चुका है तथा उनका छोटा भाई लक्ष्मण अविवाहित है, अत: वह उसके पास जाय।"

लक्ष्मण द्वारा नाक-कान काटना

लक्ष्मण ने शूर्पणखा के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर उसे फिर राम के पास भेजा। शूर्पणखा ने राम से पुन: विवाह का प्रस्ताव रखते हुए कहा- "मैं सीता को अभी खाये लेती हूं, तब सौत न रहेगी और हम विवाह कर लेंगे।" जब वह सीता की ओर झपटी तो राम के आदेशानुसार लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिए। वह क्रुद्ध होकर अपने भाई खर के पास गयी। खर ने चौदह राक्षसों को राम-हनन के निमित्त भेजा, क्योंकि शूर्पणखा राम, लक्ष्मण और सीता का लहू पीना चाहती थी। राम ने उन चौदहों को मार डाला तो शूर्पणखा पुन: रोती हुई अपने भाई खर के पास गयी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. बूढ़ी कुरुप तथा डरावनी राक्षसी
  2. वाल्मीकि रामायण, अरण्य कांड, 17-30।, उत्तर कांड, 12।1-2, 24।23-42

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