मंथरा  

संक्षिप्त परिचय
मंथरा
मंथरा तथा कैकेयी
अवतार गन्धर्व कन्या
समय-काल रामायण काल
महाजनपद केकय
निवास अयोध्या
प्राकृतिक स्वरूप कुबड़ी
संदर्भ ग्रंथ रामायण
अपकीर्ति राम को वनवास और भरत को अयोध्या की राजगद्दी दिलाने के लिए रानी कैकेयी को मंथरा ने ही उकसाया था।
संबंधित लेख कैकेयी, भरत, रामायण
अन्य जानकारी जब कैकेयी का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ, तब मंथरा भी कैकेयी के साथ ही अयोध्या आ गई थी।

मंथरा अयोध्या के राजा दशरथ की रानी कैकेयी की प्रिय दासी थी। वह एक कुबड़ी स्त्री थी।

किंवदंती

एक किंवदंती के अनुसार यह माना जाता है कि पूर्वजन्म में मंथरा 'दुन्दुभि' नाम की एक गन्धर्व कन्या थी। 'रामचरितमानस' के अनुसार मंथरा दासी के कहने पर ही राम के राज्याभिषेक होने के अवसर पर कैकयी की मति फिर गयी और उसने राजा दशरथ से दो वरदान माँगे। पहले वर में उसने भरत को राज्यपद और दूसरे वर में राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास माँगा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 समर्पण (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 07 मई, 2013।

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