दुर्वासा  

दुर्वासा सतयुग, त्रेता एवं द्वापर तीनों युगों के एक प्रसिद्ध सिद्ध योगी और महान् महर्षि थे। वे अपने क्रोध के लिए जाने जाते थे। छोटी-सी त्रुटि हो जाने पर ही वे शाप दे देते थे। महर्षि दुर्वासा महादेव शंकर के अंश से आविर्भूत हुए थे।

जन्म

ब्रह्मा के पुत्र अत्रि ने सौ वर्ष तक ऋष्यमूक पर्वत पर अपनी पत्नी अनुसूया सहित तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने उन्हें एक-एक पुत्र प्रदान किया। ब्रह्मा के अंश से विधु, विष्णु के अंश से दत्त तथा शिव के अंश से दुर्वासा का जन्म हुआ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत, वनपर्व, अध्याय 262 से 263 तक, दान धर्मपर्व, अध्याय 159
  2. शिव पुराण, 7 । 25-26 ।-

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