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गुडाकेश (असुर) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

गुडाकेश (असुर)  

Disamb2.jpg गुडाकेश एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- गुडाकेश (बहुविकल्पी)

गुडाकेश बहुत पहले, सृष्टि के प्रारम्भ में हुआ एक महासुर था। वह तांबे का शरीर धारण करके चौदह हज़ार वर्ष तक अडिग श्रद्धा और बड़ी दृढ़ता के साथ भगवान की आराधना करता रहा। उसकी निश्‍चयपूर्ण तीव्र तपस्‍या से संतुष्‍ट होकर भगवान विष्णु उसके रमणीय आश्रम पर प्रकट हुए।

भगवान का दर्शन

तपस्‍यारत गुडाकेश भगवान को देखकर कितना आनन्दित हुआ, यह बात कही नहीं जा सकती। शंख-चक्र-गदाधारी, चतुर्बाहु, पीताम्‍बर पहने, मन्‍द-मन्‍द मुस्कराते हुए भगवान के चरणों पर वह गिर पड़ा। उसके सारे शरीर में रोमांच हो आया, आंखों से आंसू बहने लगे, हृदय गद्गद हो गया, गला रुँध गया और वह उनसे कुछ भी नहीं बोल सका। थोड़ी देर के बाद जब कुछ संभला, तब अंजलि बांधकर, सिर झुकाकर भगवान के सामने खड़ा हो गया। भगवान ने मुस्काते हुए कहा- "निष्‍पाप गुडाकेश! तुमने कर्म से, मन से, वाणी से, जिस वस्‍तु को वांछनीय समझा हो, जो चीज तुम्‍हें अच्‍छी लगती हो, मांग लो। मैं आज तुम्‍हें सब कुछ दे सकता हूँ।"

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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