कीचक  

कीचक महाभारत में विराट नरेश का साला तथा उनकी पत्नि सुदेष्णा का भाई था। वह अत्यधिक बलशाली और वीर सेनापति था, किंतु पांडु पुत्र भीम के हाथों उसका वध हुआ था। कीचक क्षत्रिय पिता तथा ब्राह्मणी माता का सूत पुत्र कहलाता है। वह केकय राजा (सूतों के अधिपति) के मालवी नामक पत्नी के पूत्रों में सबसे बड़ा था। केकय नरेश की दूसरी रानी की कन्या का नाम सुदेष्णा था, वही अपने अनेक भाइयों की एकमात्र बहन थी, जिसका विवाह राजा विराट से हुआ था। उसके भाइयों की संख्या बहुत अधिक थी तथा सभी शक्तिशाली होकर विराट के साथियों में थे।

विराट की सभा में कीचक द्वारा सैरंध्री का अपमान

द्रोपदी से विवाह प्रस्ताव

अपने अज्ञातवास के समय पाण्डव विराट के महल में छद्मवेश में रह रहे थे। महल में द्रौपदी को सैरंध्री बनकर छद्मवेश में रानी सुदेष्णा की सेवा करते दस मास से अधिक हो चुके थे, तभी एक दिन राजा विराट के सेनापति तथा साले कीचक ने उसे देखा तो उस पर आसक्त हो गया। उसने सुदेष्णा की आज्ञा लेकर सैरंध्री के सम्मुख विवाह का प्रस्ताव रखा, किंतु सैरंध्री ने यह बता कर कि उसका विवाह हो चुका है तथा पाँच शक्ति संपन्न गंधर्व उसके पति तथा सरंक्षक हैं, उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

अभद्र व्यवहारी

द्रोपदी के इंकार करने पर भी कीचक मानने वाला नहीं था। रानी को भी उसके रूप के प्रति अपने पति के आकर्षण का भय बना रहता था, अत: उसने भाई से सलाह कर एक दिन सैरंध्री को उसके महल में शराब लेने के बहाने भेजा। मार्ग में सैरंध्री सूर्य भगवान से अपनी रक्षा की प्रार्थना करती हुई गयी। कीचक पहले से ही तैयार था। उसने सैरंध्री से बहुत ही अभद्र व्यवहार किया और उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास किया। किंतु सैरंध्री उससे छूटकर दौड़ती हुई राजा विराट की सभा में पहुँची। कीचक ने उसे अपने पांव से ठोकर मारी तथा उसके बाल खींचे- किंतु अज्ञातवास का भेद खुलने के भय से पांडव सब कुछ देखते हुए भी उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं बढ़े। राजा विराट ने कीचक को समझा-बुझाकर लौटा दिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत, विराटपर्व, अध्याय 14 से 24 तक

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