वृषाकपि  

Disamb2.jpg वृषाकपि एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- वृषाकपि (बहुविकल्पी)

वृषाकपि पौराणिक महाकाव्य महाभारत के अनुसार भगवान विष्णु का ही एक नाम है।[1] [2]

  • विष्णु सहस्रनाम में विष्णु का एक नाम वृषाकपि है, शायद परवर्ती वैदिक काल में विष्णु, इंद्र से प्रभावशाली देवता होते जा रहे थे, कहीं-कहीं उनको इंद्र का छोटा भ्राता भी कहा गया है।[3]

अजः सर्वेश्वरः सिद्धः सिद्धिः सर्वादि:-अच्युतः ।
वृषाकपि:-अमेयात्मा सर्व-योग-विनिःसृतः ।।
वसु:-वसुमनाः सत्यः समात्मा संमितः समः ।
अमोघः पुण्डरीकाक्षो वृषकर्मा वृषाकृतिः ।।
वृषाही वृषभो विष्णु:-वृषपर्वा वृषोदरः ।
वर्धनो वर्धमानश्च विविक्तः श्रुति-सागरः ।।
शुभांगः शांतिदः स्रष्टा कुमुदः कुवलेशयः ।

गोहितो गोपतिर्गोप्ता वृषभाक्षो वृषप्रियः ।।[3]


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=वृषाकपि&oldid=545935" से लिया गया