पुलोमा  

Disamb2.jpg पुलोमा एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- पुलोमा (बहुविकल्पी)

पुलोमा हिन्दू मान्यताओं और पौराणिक महाकाव्य महाभारत के उल्लेखानुसार वैश्वानर नामक दैत्य की चार पुत्रियों में से एक थी, जो ऋषि भृगु की पत्नी थी। अन्य मत से यह कश्यप[1]की पत्नी थी।[2] पुलोमा के पुत्र महर्षि च्यवन थे।

आश्रम में राक्षस का आगमन

पुलोमा अपने पति भृगु को बहुत ही प्यारी थी। उसके उदर में भृगु के वीर्य से उत्पन्न गर्भ पल रहा था। उनकी कुक्षि में उस गर्भ के प्रकट होने पर एक समय धर्मात्माओं में श्रेष्ठ भृगु जी स्नान करने के लिये आश्रम से बाहर निकले। उस समय एक राक्षस, जिसका नाम भी पुलोमा ही था, उनके आश्रम पर आया। आश्रम में प्रवेश करते ही उसकी दृष्टि महर्षि भृगु की पतिव्रता पत्नी पर पड़ी और वह कामदेव के वशीभूत हो अपनी सुध-बुध खो बैठा। सुन्दरी ने उस राक्षस को अभ्यागत अतिथि मानकर वन में फल-मूल आदि से उसका सत्कार करने के लिये उसे न्योता दिया। वह राक्षस काम से पीड़ित हो रहा था। उस समय उसने वहाँ पुलोमा को अकेली देख बड़े हर्ष का अनुभव किया, क्योंकि वह सती-साध्वी पुलोमा को हर ले जाना चाहता था। मन में उस शुभ लक्षणा सती के अपहरण की इच्छा रखकर वह प्रसन्नता से फूल उठा। पवित्र मुसकान वाली पुलोमा को पहले उस पुलोमा नामक राक्षस ने वरण[3] किया था।[4] किन्तु पीछे उसके पिता ने शास्त्र विधि के अनुसार महर्षि भृगु के साथ उसका विवाह कर दिया। उसके पिता का वह अपराध राक्षस के हृदय में सदा काँटे सा कसकता रहता था। यही अच्छा मौका है, ऐसा विचार कर उसने उस समय पुलोमा को हर ले जाने का पक्का निश्चय कर लिया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

पौराणिक कोश |लेखक: राणा प्रसाद शर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 317 |

  1. मारीच
  2. भागवत पुराण 6-6-33-4; ब्रह्माण्ड पुराण 3.6.25; मत्स्य पुराण 6.22; वायुपुराण 68.23; विष्णु पुराण 1.21.8-9)
  3. बाल्यावस्था में पुलोमा रो रही थी। उसके रूदन की निवृत्ति के लिये पिता ने डराते हुए कहा- "रे राक्षस ! तू इसे पकड़ ले।" घर में पुलोमा राक्षस पहले से ही छिपा हुआ था। उसने मन ही मन वरण कर लिया- "यह मेरी पत्नी है।" बात केवल इतनी ही थी। इसका अभिप्राय यह है कि हँसी खेल में भी या डाँटने डपटने के लिये भी बालकों से ऐसी बात नहीं कहनी चाहिये और राक्षस का नाम भी नहीं रखना चाहिये।
  4. महाभारत आदि पर्व अध्याय 5 श्लोक 1-19
  5. महाभारत आदि पर्व अध्याय 5 श्लोक 20-34
  6. महाभारत आदि पर्व अध्याय 6 श्लोक 1-14

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