मारीच  

  • यह लंका के राजा रावण का मामा, सुण्ड एवं ताड़का का पुत्र था।
  • सुबाहु का भाई था।
  • सुबाहु-वध के अवसर पर राम ने उसे अपने बाण से लंका पहुँचा दिया था। सीता-हरण के अवसर पर रावण ने मारीच की मायावी बुद्धि की सहायता ली।
  • मारीच कंचन का मृग बनकर सीता-हरण का कारण बना।
  • इसी अवसर पर राम ने उसे अपने बाण से मारा था।
  • राम-रावण युद्ध का सामान्यत: यह भी एक कारण समझा जाता है।
  • 'तेहि बन निकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपट मृग भयऊ' ('रामचरितमानस')

मारीच वाल्मीकि रामायण में

एक बार अयोध्या में गाधि-पुत्र मुनिवर विश्वामित्र पधारे। उमका सुचारू आतिध्य कर दशरथ ने अपेक्षित आज्ञा जानने की उन्होंने एक व्रत की दीक्षा ली है। इससे पूर्व भी वे अनेक व्रतो की दीक्षा लेते रहे किंतु समाप्ति के अवसर पर उनकी यज्ञवेदी पर रुधिर , मांस इत्यादि फेंककर मारीच और सुबाहु नामक दो राक्षस विघ्न उत्पन्न करते हैं। व्रत के, नियमानुसार वे किसी को शाप नहीं दे सकते, अतः उनका नाश करने के लिए वे दशरथी राम को साथ ले जाना चाहते हैं। राम की आयु पंद्रह वर्ष थी। दशरथ के शंका करने पर के वह अभी बालक ही है, विश्वामित्र ने उन्हें सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया तथा राम और लक्ष्मण को साथ ले गये। मार्ग में उन्होंने राम को ‘बला-अतिचला’ नामक दो विद्याएं सिखायीं, जिमसे भूख, प्यास, थकान, रोग का अनुभव तथा असावधानता में शत्रु का वार इत्यादि नहीं हो पाता। [1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. वाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 18, 36-53, सर्ग, 19 से 22 तक, वाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 40, श्लोक 1-30,वाल्मीकि रामायण, बाल अरण्य कांड, सर्ग 38, श्लोक 1-22
  2. वाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 29,30,
  3. वाल्मीकि रामायण, बाल अरण्य कांड, सर्ग 42 से 56

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