सुषेण वैद्य  

Disamb2.jpg सुषेण एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- सुषेण (बहुविकल्पी)

सुषेण वैद्य का उल्लेख रामायण में हुआ है। रामायणानुसार सुषेण लंका के राजा राक्षसराज रावण का राजवैद्य था। जब रावण के पुत्र मेघनाद के साथ हुए भीषण युद्ध में लक्ष्मण घायल होकर मूर्छित हो गये, तब सुषेण ने ही लक्ष्मण की चिकित्सा की थी।[1] उसके यह कहने पर कि मात्र संजीवनी बूटी के प्रयोग से ही लक्ष्मण के प्राण बचाये जा सकते हैं, राम भक्त हनुमान ने वह बूटी लाकर दी और लक्ष्मण के प्राण बचाये जा सके।

अपहरण

जब रावण के पुत्र मेघनाद के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए तो भगवान राम ने विभीषण से सलाह ली कि वैद्य कहाँ मिल सकता है। विभीषण ने कहा- "लंका में एक वैद्य है, जिसका नाम सुषेण है, लेकिन वे लक्ष्मण के उपचार के लिए आएंगे कि नहीं, यह कहना मुश्किल है। यह बात हनुमान ने सुन ली। उन्होंने कहा कि मैं सुषेण को उठा लाता हूँ। हनुमान लंका गए और उस भवन को ही उठा लाए, जिसमें सुषेण वैद्य सोए हुए थे। उन्हें जगाया गया। सुषेण समझदार थे। समझ गए कि उन्हें किसी अत्यंत बलशाली व्यक्ति ने बुलाया है। वरना भवन के एक हिस्से को उठाने की ताकत तो किसी में नहीं है। श्रीराम ने सुषेण के समक्ष समस्या बताई और लक्ष्मण के उपचार के लिए कहा। सुषेण ने कहा कि- "मंदार पर्वत पर संजीवनी बूटी है। यदि संजीवनी बूटी मिल जाए तो लक्मण जी तुरंत होश में आ जाएंगे और उनमें पहले से भी अधिक शक्ति आ जाएगी।" हनुमान इस कार्य के लिए तत्पर थे। सुषेण ने उन्हें बूटी का रंग-रूप और पहचान आदि बतला दी और तुरंत ही लाने को कहा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. बाल्मीकि रामायण, युद्धकांड, 92।15-26

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