कूडियाट्टम नृत्य  

कूडियाट्टम नृत्य

कूडियाट्टम नृत्य या 'कोडियाट्टम नृत्य' भारत में प्रचलित कुछ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है। यह लम्बे समय तक चलने वाली नृत्यनाटिका है। यह नृत्य कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक चलता है। प्राचीन संस्कृत नाटकों का पुरातन केरलीय नाट्य रूप ही 'कूडियाट्टम' कहलाता है। दो हज़ार वर्ष पुराने कूडियाट्टम को युनेस्को ने वैश्विक पुरातन कला के रूप में स्वीकार किया है। कूडियाट्टम नृत्य को 'चाक्यार' और 'नंपियार' समुदाय के लोग प्रस्तुत करते हैं। साधारणत 'कूत्तंपलम' नामक मंदिर से जुडे नाट्यगृहों में इस कला का मंचन होता है। कूडियाट्टम प्रस्तुत करने के लिए दीर्घकालीन प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

अर्थ

'कूडियाट्टम' शब्द का अर्थ है- 'संघ नाट्य अथवा अभिनय अथवा संघटित नाटक या अभिनय'। कूडियाट्टम में अभिनय को प्रधान्य दिया जाता है। भारत के नाट्यशास्त्र में अभिनय की चार रीति बताई गयी है - 'आंगिक', 'वाचिक', 'सात्विक' और 'आहार्य'। ये चारों रीतियाँ कूडियाट्टम में सम्मिलित रूप से जुड़ी हैं। कूडियाट्टम में हस्तमुद्राओं का प्रयोग करते हुए विशद अभिनय किया जाता है। इसमें इलकियाट्टम, पकर्न्नाट्टम, इरुन्नाट्टम आदि विशेष अभिनय रीतियाँ भी अपनाई जाती हैं। यह मनोरंजन के साथ-साथ उपदेशात्मक भी होता है। इसमें उपदेश देने वाले विदूषक की भूमिका सर्वप्रमुख होती है, जो सामाजिक बुराइयों की ओर इशारा करता है। परंतु कभी-कभी उसके व्यंग्य नृत्य के विषय से भटक भी जाते हैं।

नाटक का मंचन

नाटकों का मंचन मंदिरों में मन्नत प्रसाद के तौर पर किया जाता है। अभिनय एक तीन गुना या चार गुना प्रक्रिया है। हाथों के इशारों और प्रतीकों को पहले दिखाया जाता है, जब कविता एक स्वर में बोली जाती है। संगीत के शुरू होते ही शब्दों के अर्थ का शारीरिक भाषाओं, नजरिए और चेहरे के हाव-भाव में अनुवाद हो जाता है। तीसरा पहले की पुनरावृत्ति है। कूडियाट्टम का मंचन एक मंदिर की तरह बनाए गए थियेटर में किया जाता है, जिसे 'कोथामबम' कहते हैं। मंच को फलों और नारियल के पेड़ों की सहायता से सजाया जाता है। एक धान के साथ बहता हुआ पोत भी मंच पर रखा जाता है। मंच पर नंबियार जाति के ड्रमर बैठते हैं, जो ताँबे का एक बडा ड्रम लेकर बैठते हैं, जिसे 'मंजीरा' कहते हैं। एक ननगियार महिला झांझ बजाती है और कभी-कभी छंद पाठ भी करती है। कूडियाट्टम में संगीत के तत्व को बहुत ही ज्यादा दबा दिया गया है। इस समय विशेष प्रभाव वाले ऑर्केस्ट्रा का आगमन हो रहा है। ऑर्केस्ट्रा शंख, पाइप और सींग के बने होते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कूडियाट्टम् (हिन्दी) केरल टूरिज्म। अभिगमन तिथि: 29 जनवरी, 2011

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