वैशाखी  

वैशाखी
वैशाखी
अन्य नाम 'पैला बैसाख' पश्चिम बंगाल, 'बिशु' (केरल और तमिलनाडु), बिहू (असम)
अनुयायी सिक्ख समुदाय
उद्देश्य पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नववर्ष की खुशियाँ मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है।
प्रारम्भ हिन्दू पंचांग के अनुसार गुरु गोविन्द सिंह ने वैशाख माह की षष्ठी तिथि के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी कारण से वैशाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा।
तिथि 14 अप्रॅल (2017)
उत्सव वैशाखी विश्व भर में पंजाबियों का एक कौमी जश्न माना जाता है। पंजाबी लोगों का यह सबसे बड़ा मेला है। इस दिन लोग रंगबिरंगे कपड़े पहनकर खुशियां मनाते हैं।
अन्य जानकारी प्रत्येक 36 साल बाद भारतीय चन्द्र गणना के अनुसार वैशाखी 14 अप्रैल को पड़ती है।

वैशाखी (अंग्रेज़ी:Vaisakhi) पंजाब राज्य, भारत में सिक्ख समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। देश विदेश में वैशाखी के अवसर पर, विशेषकर पंजाब में मेले लगते हैं। लोग सुबह-सुबह सरोवरों और नदियों में स्नान कर मंदिरों और गुरुद्वारों में जाते हैं। लंगर लगाये जाते हैं और चारों तरफ लोग प्रसन्न दिखलायी देते हैं। विशेषकर किसान, गेहूँ की फ़सल को देखकर उनका मन नाचने लगता है। गेहूँ को पंजाबी किसान 'कनक' यानि सोना मानते हैं। यह फ़सल किसान के लिए सोना ही होती है, उसकी मेहनत का रंग दिखायी देता है। वैशाखी पर गेहूँ की कटाई शुरू हो जाती है। वैशाखी पर्व 'बंगाल में पैला (पीला) बैसाख' नाम से, दक्षिण में 'बिशु' नाम से और 'केरल, तमिलनाडु, असम में बिहू' के नाम से मनाया जाता है। अंग्रेज़ी कलैंडर में तारीखों के बदलाव के कारण अब वैशाखी 14 अप्रॅल को मनायी जाती है।

वैशाखी कब

  • विशेषज्ञों का मानना है कि हिन्दू पंचांग के अनुसार गुरु गोविन्द सिंह ने वैशाख माह की षष्ठी तिथि के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन मकर संक्रांति भी थी। इसी कारण से वैशाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा। सूर्य मेष राशि में प्राय: 13 या 14 अप्रैल को प्रवेश करता है, इसीलिए बैशाखी भी इसी दिन मनायी जाती है।
  • प्रत्येक 36 साल बाद भारतीय चन्द्र गणना के अनुसार बैशाखी 14 अप्रैल को पड़ती है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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