गणेश चतुर्थी  

गणेश चतुर्थी
गणेश
अन्य नाम गणेश चौथ, डण्डा चौथ
अनुयायी हिंदू
उद्देश्य गणेश जी के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशिष्ट दिन है।
तिथि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
धार्मिक मान्यता भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था।
अन्य जानकारी गणेश जी का यह पूजन करने से विद्या, बुद्धि की तथा ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही विघ्न-बाधाओं का भी समूल नाश हो जाता है।

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का त्योहार है, जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशिष्ट दिन है। श्री गणेश विघ्न विनायक हैं। ये देव समाज में सर्वोपरि स्थान रखते हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं। गणेश जी का वाहन चूहा है। ऋद्धिसिद्धि गणेश जी की दो पत्नियां हैं। इनका सर्वप्रिय भोग लड्डू हैं। प्राचीन काल में बालकों का विद्या-अध्ययन आज के दिन से ही प्रारम्भ होता था। आज बालक छोटे-छोटे डण्डों को बजाकर खेलते हैं। यही कारण है कि लोकभाषा में इसे डण्डा चौथ भी कहा जाता है।

कैसे मनाएँ

  • इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर सोने, तांबे, मिट्टी अथवा गोबर की गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। गणेश जी की इस प्रतिमा को कोरे कलश में जल भरकर, मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर उस पर स्थापित किया जाता है। फिर मूर्ति पर (गणेश जी की) सिन्दूर चढ़ाकर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए।
  • गणेश जी को दक्षिणा अर्पित करके 21 लड्डूओं का भोग लगाने का विधान है। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राह्मणों में बांट देने चाहिए। गणेश जी की आरती और पूजा किसी कार्य को प्रारम्भ करने से पहले की जाती है और प्रार्थना करते हैं कि कार्य निर्विघ्न पूरा हो।
  • गणेश जी का पूजन सायंकाल के समय करना चाहिए। पूजनोपरांत दृष्टि नीची रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देकर, ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा भी देनी चाहिए।
  • इस प्रकार चंद्रमा को अर्घ्य देने का तात्पर्य है कि जहां तक संभव हो आज के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। क्योंकि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से कलंक का भागी बनना पड़ता है। फिर वस्त्र से ढका हुआ कलश, दक्षिणा तथा गणेश जी की प्रतिमा आचार्य को समर्पित करके गणेश जी के विसर्जन का विधान उत्तम माना गया है।
  • गणेश जी का यह पूजन करने से विद्या, बुद्धि की तथा ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही विघ्न-बाधाओं का भी समूल नाश हो जाता है।

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