माघबिहू  

माघबिहू
बिहू नृत्य
अन्य नाम भोगासी बिहू, भोगाली बिहू
अनुयायी हिन्दू धर्मावलम्बी
उद्देश्य असम राज्य में जब फ़सल कट जाने के बाद किसानों के आराम का समय होता है। तब माघबिहू पर मुख्य रूप से भोज देने की प्रथा है।
तिथि 14 जनवरी या 15 जनवरी
धार्मिक मान्यता हिन्दू धर्म
संबंधित लेख बिहू, मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल
अन्य जानकारी बिहू वर्ष में तीन बार मनाया जाता है।

माघबिहू (अंग्रेज़ी: Magh Bihu) भारत के असम राज्य में एक प्रसिद्ध उत्सव है। मकर संक्रान्ति के दिन जनवरी के मध्य में माघबिहू मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रचुर मात्रा में हुई फ़सल किसान को आनन्दित करती है। यह त्यौहार जाड़े में तब मनाया जाता है, जब फ़सल कट जाने के बाद किसानों के आराम का समय होता है। माघबिहू पर मुख्य रूप से भोज देने की प्रथा है। इस कारण इसे "भोगासी बिहू" अथवा "भोग–उपभोग का बिहू" भी कहते हैं। इन्हें भी देखें: बिहू एवं बिहू नृत्य

बिहू वर्ष में तीन बार

माघबिहू वर्ष में तीन बार मनाया जाता है-

  1. रंगाली बिहू या बोहाग बिहू- फसल बुबाई की शुरूआत का प्रतीक है और इससे नए वर्ष का भी शुभारंभ होता है।
  2. भोगली बिहू या माघ बिहू- माघ महीने में फसल कटाई का त्‍योहार है।
  3. काती बिहू या कांगली बिहू- शरद ऋतु का एक मेला है।

भोज आयोजन

बिहू उत्सव के दौरान वहां के लोग अपनी खुशी का इज़हार करने के लिए लोकनृत्य भी करते हैं। स्त्रियाँ चिवड़ा, चावल की टिकिया, तरह–तरह के लारु (लड्डू) तथा कराई अर्थात् तरह–तरह के भुने हुए अनाज का मिश्रण तैयार करती हैं। ये सब चीज़ें दोपहर के समय गुड़ और दही के साथ खाई जाती हैं। सभी लोग रात्रिभोज करते हैं। छावनी के पास ही चार बांस लगाकर उस पर पुआल एवं लकड़ी से ऊंचे गुम्बद का निर्माण करते हैं जिसे 'मेजी' कहते हैं। उरुका के दूसरे दिन सुबह स्नान करके मेजी जलाकर माघ बिहू का शुभारंभ किया जाता है। गांव के सभी लोग इस मेजी के चारों ओर एकत्र होकर भगवान से मंगल की कामना करते हैं। अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए लोग विभिन्न वस्तुएं भी मेजी में भेंट चढ़ाते हैं। मेजी की अधजली लकडिय़ों और भस्म को खेतों में छिड़का जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से ज़मीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। मित्रों तथा सगे सम्बन्धियों को आमंत्रित कर आदर दिया जाता है। स्वाभाविक है कि स्वादिष्ट भोजन ही इस पर्व का अभिन्न अंग होता है। इस अवसर पर सामुदायिक भोज एक सप्ताह तक चलते हैं। साथ ही मनोरंजन के लिए अन्य कार्यक्रम जैसे पशु युद्ध इत्यादि भी आयोजित किए जाते हैं। महोत्सव के एक अभिन्न अंग के रूप में अलाव भी जलाए जाते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 असम की बिहू परंपरा (हिंदी) वेबदुनिया हिंदी। अभिगमन तिथि: 14 जनवरी, 2013।

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