गंगा दशहरा  

गंगा दशहरा
गंगा नदी, हरिद्वार
अनुयायी हिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासी
प्रारम्भ पौराणिक काल
तिथि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
अनुष्ठान इस दिन गंगा स्नान करके दूध, बताशा, जल, रोली, नारियल, धूप, दीप से पूजन करके दान देना चाहिए।
धार्मिक मान्यता ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगाजी का पृथ्वी पर आगमन हुआ था।
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दिनांक 28 मई, 2015
अन्य जानकारी इस दिन मथुरा में पतंगबाज़ी का विशेष आयोजन होता है। आज के दिन दान देने का भी विशिष्ट महत्त्व है। यह मौसम भरपूर गर्मी का होता है, अत: छतरी, वस्त्र, जूते-चप्पल आदि दान में दिए जाते हैं।
अद्यतन‎

गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ, शुक्ला, दशमी को दशहरा कहते हैं। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। स्कन्द पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी संवत्सरमुखी मानी गई है इसमें स्नान और दान तो विशेष रूप से करें। किसी भी नदी पर जाकर अर्ध्य (पू‍जादिक) एवम् तिलोदक (तीर्थ प्राप्ति निमित्तक तर्पण) अवश्य करें। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, दशमी को गंगावतरण का दिन मन्दिरों एवं सरोवरों में स्नान कर पवित्रता के साथ मनाया जाता है। इस दिन मथुरा में पतंगबाज़ी का विशेष आयोजन होता है।

गंगा का पृथ्वी पर आगमन

सबसे पवित्र नदी गंगा के पृथ्वी पर आने का पर्व है- गंगा दशहरा। मनुष्यों को मुक्ति देने वाली गंगा नदी अतुलनीय हैं। संपूर्ण विश्व में इसे सबसे पवित्र नदी माना जाता है। राजा भगीरथ ने इसके लिए वर्षो तक तपस्या की थी। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा धरती पर आई। इससे न केवल सूखा और निर्जीव क्षेत्र उर्वर बन गया, बल्कि चारों ओर हरियाली भी छा गई थी। गंगा-दशहरा पर्व मनाने की परंपरा इसी समय से आरंभ हुई थी। राजा भगीरथ की गंगा को पृथ्वी पर लाने की कोशिशों के कारण इस नदी का एक नाम भागीरथी भी है।
रंग-बिरंगी पतंगें

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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