हरिद्वार  

हरिद्वार
हर की पौड़ी, हरिद्वार
विवरण 'हरिद्वार' उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध धार्मिक नगर है। यह नगर हिन्दुओं की धार्मिक आस्था का प्रमुख केन्द्र है। संपूर्ण हरिद्वार में सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और अनेक नए पुराने मंदिर बने हुए हैं।
राज्य उत्तराखण्ड
ज़िला हरिद्वार
प्रसिद्धि हिन्दू धार्मिक स्थल
कब जाएँ सितम्बर से जून
हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाईअड्डा
रेलवे स्टेशन हरिद्वार
क्या देखें हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर, माया देवी शक्तिपीठ आदि।
एस.टी.डी. कोड 01334
पिनकोड 249403
वाहन पंजिकरण UK 08
अन्य जानकारी भारत के पौराणिक ग्रंथों और उपनिषदों में हरिद्वार को 'मायापुरी' कहा गया है। कहा जाता है समुद्र मंथन से प्राप्त किया गया अमृत यहाँ गिरा था। इसी कारण यहाँ कुंभ का मेला आयोजित किया जाता है।

हरिद्वार उत्तराखंड में स्थित भारत के सात सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे 'हरिद्वार' का शाब्दिक अर्थ है- 'हरि तक पहुँचने का द्वार'। यह शहर, पश्चिमोत्तर उत्तरांचल राज्य[1], उत्तरी भारत में स्थित है। हरिद्वार को "धर्म की नगरी" माना जाता है। सैकडों वर्षों से लोग मोक्ष की तलाश में इस पवित्र भूमि में आते रहे हैं। इस शहर की पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाने और अपने पापों का नाश करने के लिए वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना यहाँ लगा रहता है। गंगा नदी पहाड़ी इलाकों को पीछे छोड़ती हुई हरिद्वार से ही मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। उत्तराखंड क्षेत्र के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों का प्रवेश द्वार हरिद्वार ही है। संपूर्ण हरिद्वार में सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और अनेक नए पुराने मंदिर बने हुए हैं।

प्राचीनता

'हरिद्वार' शिवालिक पहाड़ियों के कोड में बसा हुआ हिन्दू धर्म के अनुयायियों का प्रसिद्ध प्राचीन तीर्थ स्थान है। यहाँ पहाड़ियों से निकल कर भागीरथी गंगा पहली बार मैदानी क्षेत्र में आती है। गंगा के उत्तरी भाग में बसे हुए 'बदरीनारायण' तथा 'केदारनाथ' नामक भगवान विष्णु और शिव के प्रसिद्ध तीर्थों के लिये इसी स्थान से मार्ग जाता है। इसीलिए इसे 'हरिद्वार' तथा 'हरद्वार' दोनों ही नामों से अभिहित किया जाता है। हरिद्वार का प्राचीन पौराणिक नाम 'माया' या 'मायापुरी' है, जिसकी सप्त मोक्षदायिनी पुरियों में गणना की जाती थी। हरिद्वार का एक भाग आज भी 'मायापुरी' नाम से प्रसिद्ध है। संभवतः माया का ही चीनी यात्री युवानच्वांग ने 'मयूर' नाम से वर्णन किया है। महाभारत में हरिद्वार को 'गंगाद्वार' कहा गया है। इस ग्रंथ में इस स्थान का प्रख्यात तीर्थों के साथ उल्लेख है।[2] किन्तु हरिद्वार नाम भी अवश्य ही प्राचीन है, क्योंकि 'हरिवंशपुराण' में 'हरद्वार' या 'हरिद्वार' का तीर्थ रूप में वर्णन है-

"हरिद्वारे कुशावर्ते नीलके भिल्लपर्वते। स्नात्वा कनखले तीर्थे पुनर्जन्म न विद्यते।"

इसी प्रकार 'मत्स्यपुराण' में भी-

"सर्वत्र सुलभा गंगा त्रिपु स्थानेषु दंर्लभा, हरिद्वारे प्रयागे च गंगासागरसंगमें।"


किंतु युवानच्वांग के समय तक (7वीं शती ई.) 'हरद्वार' का 'मायापुरी' नाम ही अधिक प्रचलित था। मध्य काल में इस स्थान की कई प्राचीन बस्तियों को, जिनमें 'मायापुरी', 'कनखल', 'ज्वालापुर' और 'भीमगोड़ा' मुख्य हैं, सामूहिक रूप से 'हरिद्वार' कहा जाने लगा था। हरिद्वार का सदा से ही ऋषियों की तपोभूमि माना जाता रहा है। कहा जाता है कि स्वर्गारोहण से पूर्व देवी लक्ष्मी ने 'लक्ष्मण झूला' स्थान के निकट तपस्या की थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. उत्तर प्रदेश से अलग कर नवगठित राज्य
  2. ऐतिहासिक स्थानावली से पेज संख्या 1007| विजयेन्द्र कुमार माथुर | वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार
  3. एशिया का सबसे पुराना सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज

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