यमुना जयंती  

यमुना जयंती
विश्राम घाट, मथुरा
अनुयायी हिन्दू, वैष्णव
प्रारम्भ पौराणिक काल
तिथि चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी
उत्सव यमुनाजी का जन्मोत्सव यमुना जयंती के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता ऐसा पुराणों में वर्णन आता है कि देवी यमुना (अपने प्राकट्य रूप में) सूर्यदेव की पुत्री तथा मृत्यु के देवता यमराज इनके अग्रज (बड़े भाई) व शनिदेव इनके अनुज (छोटे भाई‌) हैं।
संबंधित लेख यमुना, यमुनोत्री, यम द्वितीया, वृन्दावन, मथुरा, यमुना के घाट, नर्मदा जयंती
अन्य जानकारी यमुना जयंती के दिन प्रातः स्नान करते समय पानी में काले तिल मिलाएं और "श्री कृष्ण शरणम ममः" मंत्र का जाप करते करते स्नान करें ।

यमुना जयंती (अंग्रेज़ी: Yamuna Jayanti) वासंतिक नवरात्र की छठ (चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी) को श्रद्धालु भक्तों द्वारा मनाई जाती है। भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार नदियों को दैवीय रूप में पूजा जाता है। यमुना नदी का उद्गम स्थान हिमालय के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा कालिंदी कहा जाता है। यमुना देवी के रूप में पूजित हैं। श्रद्धालु भक्तों द्वारा यमुनाजी का जन्मोत्सव यमुना जयंती के रूप में मनाया जाता है।

पौराणिक मान्यता

ऐसा पुराणों में वर्णन आता है कि देवी यमुना (अपने प्राकट्य रूप में) सूर्यदेव की पुत्री तथा मृत्यु के देवता यमराज इनके अग्रज (बड़े भाई) व शनिदेव इनके अनुज (छोटे भाई‌) हैं। वैष्णव मतानुसार, यमुना भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी हैं। जहां श्रीकृष्ण ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते है, वहां यमुना ब्रज संस्कृति की जननी मानी जाती है। अतः यमुना जी सत्यरूप में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज क्षेत्र में इन्हें यमुना मैया कहा जाता है। ऐसा गर्ग संहिता में वर्णन है कि गोलोक में श्रीकृष्ण ने राधा से भूतल पर अवतरित होने का आग्रह किया था। जहां वृंदावन, यमुना व गोवर्धन न हो, वहां जाकर सुखानुभूति न होने की बात राधा ने कही। तब श्रीकृष्ण ने सबको ब्रज-मंडल में अवतरित कराया।

प्रकटीकरण

उत्तराखंड में यमुनोत्री से निकलकर ब्रजमंडल की नीलमणिमय मेखला (करधनी) की भांति सुशोभित होते हुए तीर्थराज प्रयाग तक प्रवाहित होने वाली यमुना ब्रज-रसिकों का प्राण है। ब्रज-मंडल में यमुना श्रीराधा-माधव युगल के रसमय केलि-विलास की दृष्टा ही नहीं, अपितु स्रष्टा भी हैं। यह अपने मनोरम तट पर सघन वृक्षावलियों एवं कमनीय कुंजों द्वारा प्रिया-प्रियतम के मधुर लीला-विलास में सहायक हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 श्री यमुना जयंती: शनिदेव की बहन का जन्मोत्सव है आज (हिन्दी) पंजाब केसरी। अभिगमन तिथि: 23 मार्च, 2015।

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