कल्कि जयंती  

कल्कि जयंती
कल्कि bhagavaan
विवरण पुराणों में कल्कि अवतार के कलियुग के अंतिम चरण में आने की भविष्यवाणी की गई है। अभी कलियुग का प्रथम चरण ही चल रहा है, लेकिन अभी से कल्कि अवतार के लिए पूजा-पाठ और कर्मकांड शुरू हो चुके हैं।
तिथि श्रावण, शुक्ल पक्ष, षष्ठी
संबंधित लेख भगवान विष्णु, विष्णु सहस्रनाम, कल्कि अवतार
अन्य जानकारी शास्त्रों के अनुसार कलियुग के अंतिम दौर में भगवान विष्णु अपने दसवें अवतार के रूप में कल्कि भगवान का अवतार लेंगे। उनका यह अवतार कलियुग और सतयुग के संधि काल में होगा, जो 64 कलाओं से युक्त होगा।

कल्कि जयंती श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। पुराणों, धर्मग्रंथों तथा हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कल्कि अवतार कहलाएगा।

संक्षिप्त परिचय

भगवान कल्कि के आगमन को चिह्नित करने के लिए कल्कि जयंती का त्यौहार मनाया जाता है। कल्कि, भगवान विष्णु के दसवें अवतार हैं। भगवान विष्णु के सभी 10 अवतारों में से 9, पहले ही अवतारित हो चुके हैं और केवल दसवें यानी अंतिम अवतार, भगवान कल्कि का प्रकट होना बाकी है। सत्ययुग के पुनरुत्थान और बुरे कर्मों (अधर्म) को खत्म करने के लिए भगवान महाविष्णु के कलियुग में कल्कि के रूप में आने की उम्मीद है। इसलिए दुनिया भर में उनके आगमन की उम्मीद करने और आनंद लेने के लिए यह त्यौहार देशभर में कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है।

संस्कृत शब्द "कालका" नाम से 'कल्कि' उत्पन्न हुआ है। कल्कि नाम उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो इस ब्रह्मांड से सभी तरह की गंदगी और कचरे को समाप्त करता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु भगवान कल्कि के रूप में प्रकट होंगे ताकि अंधेरे बलों और इस दुनिया से बुराई को दूर किया जा सके, जिससे इस ब्रह्मांड में धार्मिकता (धर्म) और शांति स्थापित हो सके।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. बिना अवतार लिए ही हर साल इस देवता की क्यों मनाई जाती है जयंती (हिंदी) amarujala.com। अभिगमन तिथि: 16 अगस्त, 1018।
  2. कल्कि जयंती के बारे में (हिंदी) hindi.mpanchang.com। अभिगमन तिथि: 16 अगस्त, 1018।
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