गुड फ़्राइडे  

गुड फ़्राइडे
ईसा मसीह गुड फ़्राइडे के दिन
अन्य नाम होली फ़्राइडे, ब्लैक फ़्राइड, ग्रेट फ़्राइडे
अनुयायी यह त्यौहार ईसाई धर्म के लोगों द्वारा ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
तिथि 14 अप्रैल (2017)
उत्सव इस मौक़े पर चर्च को सजाया जाता है और पर्व की शुरुआत बाइबिल के पाठ से की जाती है। इसके बाद पवित्र क्रूस यात्रा शुरू होती है। फिर वापस चर्च आकर खत्म होती है। इसके बाद प्रभु के बलिदान को याद किया जाता है।
धार्मिक मान्यता रोमन कैथोलिक चर्च गुड फ़्राइडे को उपवास दिवस के तौर पर मानता है, जबकि चर्च के लैटिन संस्कारों के अनुसार एक बार पूरा भोजन हालांकि वह नियमित भोजन से कम होता है और अक्सर उसमें मांस के बदले मछली खायी जाती है और दो कलेवा यानी अल्पाहार लिया जाता है।
अन्य जानकारी भारत में, गुड फ़्राइडे के दिन केन्द्रीय छुट्टी के साथ ही साथ राज्य की भी छुट्टी है, यद्यपि शेयर बाज़ार सामान्यतः बंद रहते हैं।

गुड फ़्राइडे (अंग्रेज़ी: Good Friday) को होली फ़्राइडे, ब्लैक फ़्राइडे और ग्रेट फ़्राइडे भी कहते हैं। इस दिन तीन बजे से छह बजे तक यह पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार ईसाई धर्म के लोगों द्वारा ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जो ईस्टर सन्डे से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को आता है। इस मौक़े पर चर्च को सजाया जाता है और पर्व की शुरुआत बाइबिल के पाठ से की जाती है। इसके बाद पवित्र क्रूस यात्रा शुरू होती है। फिर वापस चर्च आकर खत्म होती है। इसके बाद प्रभु के बलिदान को याद किया जाता है। शुरू में किश्चियन चर्च ईस्टर रविवार यानी उनके जीवित होने के दिन को ही पवित्र दिन के रूप में मानते थे। किंतु चौथी सदी से गुडफ़्राइडे सहित ईस्टर के पूर्व आने वाले प्रत्येक दिन को पवित्र घोषित किया गया।[1]

बलिदान का दिन

कहा जाता है कि जब धरती पर मनुष्य पथभ्रष्ट होने लगा, धर्म के नाम पर हिंसा, आतंक, भ्रष्टाचार, अत्याचार और अंधविश्वास बढ़ गया तब परमेश्वर को शांति और प्रेम के लिए यीशु को अपने पुत्र के रूप भेजना पड़ा और यीशु ने कांटों का ताज पहन कर, सूली पर चढ़कर मानवता की सीख दी। 'गुड फ़्राइडे’ इसी मानवता के लिए प्राण का न्यौछावर करने का दिन है। आज से दो हज़ार साल पहले धर्म और जाति के नाम पर ख़ून-ख़राबा होने लगा था। लोग स्वार्थ में अंधे होकर पाप कर्म में लिप्त हो गये। जगह-जगह आतंक और अत्याचार बढ़ने लगा,तब पिता परमेश्वर ने निर्दोषों की रक्षा और भटके हुए लोगों को संमार्ग पर लाने के लिए अपने पुत्र की बलि देने का निर्णय किया। उन्होंने यीशु को धरती पर भेजकर मनुष्य को पाप कर्म से मुक्त होकर अपना जीवन सुधारने का मौक़ा दिया। जैसा कि कहा जाता है यीशु मसीह का जन्म ‘पलिस्तीन’ यानी इजराइल के एक गांव बैतलहम में अलौकिक शक्ति से मरियम के माध्यम से हुआ। उस वक़्त यीशु मसीह की माता मरियम और यूसुफ़ यानी यीशु के पिता की मंगनी ही हुई थी। दोनों के संयोग से पहले ही मरियम के गर्भवती होने की वजह से यूसूफ ने उन्हें त्यागने का मन बना लिया, लेकिन इससे पहले ही प्रभु के स्वर्गदूत ने यूसूफ को स्वप्न में मरियम के गर्भ में पवित्र आत्म के होने और उसकी रक्षा करने का आदेश दिया। यूसुफ ने प्रभु के दुत की आज्ञा मानी और जन्म के बाद बालक का नाम “यीशु” रखा। बालक यीशु को बैतलहम के राजा ‘हेरोदेस’ ने मरवाने की पर संभव प्रयास किया, लेकिन इससे पहले ही यूसूफ प्रभु के दूत के आदेश के पर मरियम और यीशु को लेकर मिस्र चले गये और राजा हेरोदेस के मरने तक मिस्र में रहे। फिर पुन: स्वप्न में चेतावनी पाकर गलील देश में चले गए और नासरत नाम के नगर में जा बसे।

यीशु जगह-जगह जाकर लोगों को मानवता और शांति का संदेश देने लगे। उन्होंने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले फरीसियों यानी धर्मपंडितों को मानवजाति का शत्रु कहा। अज्ञानता और अंधविश्वास को मानवता का कलंक कहा। उनके संदेशों से परेशान होकर धर्मपंडितों ने उन्हें धर्म की अवमानना का आरोप लगाकर उन्हें मौत की सज़ा दी। पर यीशु अपनी नियति से अवगत थे। यीशु मसीह को कई तरह की यातनाएं दी गयीं। सैनिकों ने यीशु का उपहास उड़ाया। यीशु को उनके कपड़े उतारकर लाल चोंगा पहनाया गया। कांटों का ताज उनके सिर पर रखा गया। इतना ही नहीं यीशु के मुंह पर थूका गया और उनके सर पर सरकण्डों से प्रहार किये गये। इसके बाद यीशु क्रूस को अपने कंधे पर उठाकर ‘गोल गोथा’ नामक जगह ले गये। जहां उन्हें दिन के बारह बजे दो डाकूओं के साथ एक को दाहिनी और दूसरा को बाई तरफ क्रूसों पर चढ़ा दिया गया। जिस दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया वह शुक्रवार को दिन था। तीन घंटे बाद यीशु ने ऊंची आवाज़ में परमेश्वर को पुकारा ‘हे पिता मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं,’ इतना कहकर उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। मानवता के लिए बलिदान का वो दिन गुडफ़्राइडे था। ईसाई धर्म के अनुयायी यीशु को उनके त्याग के लिए याद करते हैं। मौत के बाद यीशु को क़ब्र में दफना दिया गया, हैरानी तो तब हुई जब तीन दिन बाद यानी रविवार को यीशु जीवित हो उठे। कहते हैं पुन: जीवित होने के बाद यीशु चालीस दिन तक अपने शिष्यों और मित्रों के साथ रहे और अंत में स्वर्ग चले गये।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 गुडफ़्राइडे यानी बलिदान का दिन (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) समय लाइव डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 22 अप्रॅल, 2011
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 2.4 प्रेम और क्षमा का संदेश देता है गुड फ़्राइडे (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) आज तक। अभिगमन तिथि: 22 अप्रॅल, 2011
  3. गुड फ़्राइडे का गुड संदेश (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) विस्फोट डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 22 अप्रॅल, 2011
  4. श्रद्धा से मनाया जाता है गुड फ़्राइडे (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) star news agency। अभिगमन तिथि: 22 अप्रॅल, 2011

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