बलदेव छठ  

बलदेव छठ
मथुरा में बलदेव छठ मनाते लोग
अन्य नाम देवछठ
अनुयायी हिन्दू
तिथि भाद्रपद शुक्ल पक्ष षष्ठी
उत्सव इस दिन मथुरा के दाऊजी में विशाल मेला आयोजित होता है और दाऊजी के मन्दिर में विशेष पूजा एवं दर्शन होते हैं।
धार्मिक मान्यता 'गर्ग पुराण' के अनुसार देवकी के सप्तम गर्भ को योगमाया ने संकर्षण कर वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में पहुँचाया। रोहिणी के गर्भ से ही 'शेषावतार बलराम' प्रकट हुए।
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अन्य जानकारी बल्देव जी का मन्दिर में क़रीब आठ फुट ऊँचा, साढ़े तीन फुट चौड़ा श्याम वर्ण विग्रह विराजमान है। विग्रह के पीछे शेषनाग फन फैलाए खड़े हैं।

बल्देव छठ का सम्बन्ध श्री बलराम जी से है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ब्रज के राजा और भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बल्देव जी का जन्मदिन ब्रज में बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। 'देवछठ' के दिन दाऊजी में विशाल मेला आयोजित होता है और दाऊजी के मन्दिर में विशेष पूजा एवं दर्शन होते हैं।

पौराणिक संदर्भ

ब्रज के राजा दाऊजी महाराज के जन्म के विषय में 'गर्ग पुराण' के अनुसार देवकी के सप्तम गर्भ को योगमाया ने संकर्षण कर रोहिणी के गर्भ में पहुँचाया। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के स्वाति नक्षत्र में वसुदेव की पत्नी रोहिणी जो कि नन्दबाबा के यहाँ रहती थी, के गर्भ से अनन्तदेव 'शेषावतार' प्रकट हुए। इस कारण श्री दाऊजी महाराज का दूसरा नाम 'संकर्षण' हुआ। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बुधवार के दिन मध्याह्न 12 बजे तुला लग्न तथा स्वाति नक्षत्र में बल्देव जी का जन्म हुआ। उस समय पाँच ग्रह उच्च के थे। इस समय आकाश से छोटी-छोटी वर्षा की बूँदें और देवता पुष्पों की वर्षा कर रहे थे।

दाऊजी महाराज का नामकरण

नन्दबाबा ने विधिविधान से कुलगुरु गर्गाचार्य जी से दाऊजी महाराज का नामकरण कराया। पालने में विराजमान शेषजी के दर्शन करने के लिए अनेक ऋषि, मुनि आये। 'कृष्ण द्वैपायन व्यास' महाराज ने नन्दबाबा को बताया कि यह बालक सबका मनोरथ पूर्ण करने वाला होगा। प्रथम रोहिणी सुत होने के कारण रोहिणेय द्वितीय सगे सम्बन्धियों और मित्रों को अपने गुणों से आनन्दित करेंगे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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