रत्न  

रत्न
रत्न
विवरण रत्न आकर्षक खनिज का एक टुकड़ा होता है जो कटाई और पॉलिश करने के बाद गहने और अन्य अलंकरण बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
उत्पत्ति खनिज रत्न खानों से, जैविक रत्न समुद्र से और वानस्पतिक रत्न पर्वतों से प्राप्त होते हैं।
प्रकार तीन (खनिज रत्न, जैविक रत्न और वानस्पतिक रत्न)
धार्मिक मान्यता 'अग्नि पुराण' के अनुसार - महाबली असुरराज वृत्रासुर ने देवलोक पर आक्रमण किया। तब भगवान विष्णु की सलाह पर इन्द्र ने महर्षि दधीचि से वज्र बनाने हेतु उनकी हड्डियों का दान मांगा। फिर इसी वज्र से देवताओं ने वृत्रासुर का संहार किया। अस्त्र (वज्र) निर्माण के समय दधीचि की अस्थियों के, जो सूक्ष्म अंश पृथ्वी पर गिरे, उनसे तमाम रत्नों की खानें बन गईं।
नवरत्न गोमेद, नीलम, पन्ना, पुखराज, माणिक्य, मूँगा, मोती, लहसुनिया और हीरा
रासायनिक तत्त्व इन रत्नों में मुख्यतः कार्बन, बेरियम, बेरिलियम, एल्यूमीनियम, कैल्शियम, जस्ता, टिन, तांबा, हाइड्रोजन, लोहा, फॉस्फोरस, मैंगनीज़, गंधक, पोटैशियम, सोडियम, जिंकोनियम आदि तत्त्व उपस्थित होते हैं।
अन्य जानकारी प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार उच्च कोटि में 84 प्रकार के रत्न आते हैं। इनमें से बहुत से रत्न अब अप्राप्य हैं तथा बहुत से नए-नए रत्नों का आविष्कार भी हुआ है। वर्तमान समय में प्राचीन ग्रंथों में वर्णित रत्नों की सूचियाँ प्रामाणिक नहीं रह गई है।

रत्न (अंग्रेज़ी:Gemstone) आकर्षक खनिज का एक टुकड़ा होता है जो कटाई और पॉलिश करने के बाद गहने और अन्य अलंकरण बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। बहुत से रत्न ठोस खनिज के होते हैं, लेकिन कुछ नरम खनिज के भी होते हैं। रत्न क़ीमती पत्थर को कहा जाता है। अपनी सुंदरता की वजह से यह क़ीमती होते हैं। रत्न अपनी चमक और अन्य भौतिक गुणों के सौंदर्य की वजह से गहने में उपयोग किया जाता है। ग्रेडिंग, काटने और पॉलिश से रत्नों को एक नया रूप और रंग दिया जाता है और इसी रूप और रंग की वजह से यह रत्न गहनों को और भी आकर्षक बनाते हैं। रत्न का रंग ही उसकी सबसे स्पष्ट और आकर्षक विशेषता है। रत्नों को गर्म कर के उसके रंग की स्पष्टता बढ़ाई जाती है।

रत्न कोई भी हो अपने आपमें प्रभावशाली होता है। मनुष्य अनादिकाल से ही रत्नों की तरफ आकर्षित रहा है, वर्तमान में भी है तथा भविष्य में भी रहेगा। रत्न शरीर की शोभा आभूषणों के रूप में तो बढ़ाते ही हैं और कुछ लोगों का मानना है की रत्न अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव के कारण रोगों का निवारण भी करते हैं। इन रत्नों से जहाँ स्वयं को सजाने-सँवारने की स्पर्धा लोगों में पाई जाती है वहीं संपन्नता के प्रतीक ये अनमोल रत्न अपने आकर्षण तथा उत्कृष्टता से सबको वशीभूत कर विश्व व्यापी से बखाने जाते हैं। रत्न और जवाहरात के नाम से जाने हुए ये खनिज पदार्थ विश्व की बहुमूल्य राशी हैं, जो युगों से अगणित मनों को मोहते हुए अपनी महत्ता बनाए हुए हैं।

रत्न क्या हैं?

रत्न किसे कहते हैं? यह एक बुनियादी सवाल है। इसके बिना हम रत्न द्वारा अशुभ निदान एवं चिकित्सा के बारे में सोच नहीं सकते। इसलिए सबसे पहले इससे जानना ज़रूरी है। यूँ तो रत्न एक क़िस्म के पत्थर ही होते हैं, लेकिन सभी पत्थर रत्न नहीं कहे जाते। पत्थर और रत्न में कुछ फ़र्क़ होता है। यदि इस फ़र्क़ को बेहतर ढंग से समझ लिया जाए तो हम रत्न को पत्थरों से छाँटकर निकाल सकते हैं। उनकी शिनाख़्त कर सकते हैं और फिर अपने दैनिक जीवन में उनका बेहतर प्रयोग कर सकते हैं। यदि ऐसा न करके हम बिना सोचे-समझे रत्नों का इस्तेमाल करते हैं तो उल्टा असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में हमें नुक़सान भी उठाना पड़ सकता है। इसलिए रत्नों का उपयोग जांच-परखकर तथा सोच-विचारकर करना चाहिए। कुछ पत्थर या पदार्थों के गुण, चरित्र एवं विशेषताएँ ऐसी होती हैं कि उन्हें देखते ही रत्न कह दिया जाता है, जैसे-हीरा, माणिक्य, वैदूर्य, नीलम, पुखराज, पन्ना आदि को लोग रत्न के नाम से पुकारते हैं। वैसे वास्तव में ये सारे पत्थर ही हैं, लेकिन बेशक़ीमती पत्थर। इसलिए अंग्रेज़ी में इन्हें प्रिसियस स्टोन (बहुमूल्य पत्थर) कहते हैं। 'रत्न' का विशेष अर्थ श्रेष्ठत्व भी है। इसी वजह से किसी ख़ास व्यक्ति को उसके महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए 'रत्न' शब्द से विभूषित किया जाता है। प्राचीनकाल से ही रत्न का अर्थ-भूगर्भ या समुद्र तल से प्राप्त होने वाले हीरा, मोती, माणिक्य आदि समझा जाता रहा है। रत्न भाग्य-परिवर्तन में शीघ्रातिशीघ्र अपना प्रभाव दिखाता है। दरअसल, पृथ्वी के अन्दर लाखों वर्षों तक पड़े रहने के कारण उसमें पृथ्वी का चुम्बकत्व तथा तेज़त्व आ जाता है। पृथ्वी के जिस क्षेत्र में जिस ग्रह का असर अधिक होता है, उस क्षेत्र के आसपास उस ग्रह से सम्बन्धित रत्न अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। वास्तव में पृथ्वी ग्रहों के संयोग से अपने अन्दर रत्नों का निर्माण करती है। अत: इसे 'रत्नग' भी कहा जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. लाभकारी है पन्ना धारण करना (हिन्दी) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 17 जुलाई, 2010
  2. हीरा है शुक्र का रत्न (हिन्दी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 19 जुलाई, 2010।
  3. नीलम है शनि का रत्न (हिन्दी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 17 जुलाई, 2010

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