कार्तिक स्नान  

कार्तिक स्नान
विश्राम घाट, मथुरा
विवरण हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में 'कार्तिक स्नान' का बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। 'स्कंदपुराण' के अनुसार कार्तिक मास में किया गया स्नान व व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान कहा गया है।
तिथि कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा
धार्मिक मान्यता पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति इस माह में स्नान, दान तथा व्रत करते हैं, उनके पापों का अन्त हो जाता है।
संबंधित देवता विष्णु
विशेष 'त्रिकार्तिक व्रत' कार्तिक पूर्णिमा से तीन दिन पहले शुरू होता है। त्रिकार्तिक व्रत रखने वाले को कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए।
संबंधित लेख विष्णु, शिव, गंगा, कार्तिकेय
अन्य जानकारी कार्तिक के पूरे महीने में ब्रज की महिलायें झुण्ड बनाकर गीत गाती हुई, यमुना या कुण्ड स्नान करती हैं और राधा-दामोदार की पूजा करती हैं।

कार्तिक स्नान की पुराणों में बड़ी महिमा कही गई है। कार्तिक मास को स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। 'स्कंदपुराण' के अनुसार कार्तिक मास में किया गया स्नान व व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान कहा गया है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह और पूर्णिमा को गंगा स्नान किया जाता है।

स्नान

कार्तिक मास में स्नान किस प्रकार किया जाए, इसका वर्णन शास्त्रों में इस प्रकार लिखा है-

तिलामलकचूर्णेन गृही स्नानं समाचरेत्।
विधवास्त्रीयतीनां तु तुलसीमूलमृत्सया।।
सप्तमी दर्शनवमी द्वितीया दशमीषु च।
त्रयोदश्यां न च स्नायाद्धात्रीफलतिलैं सह।।

अर्थात् कार्तिक व्रती को सर्वप्रथम गंगा, विष्णु, शिव तथा सूर्य का स्मरण कर नदी, तालाब या पोखर के जल में प्रवेश करना चाहिए। उसके बाद नाभिपर्यन्त[1] जल में खड़े होकर विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए। गृहस्थ व्यक्ति को काला तिल तथा आँवले का चूर्ण लगाकर स्नान करना चाहिए, परंतु विधवा तथा सन्न्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मृत्तिका (मिट्टी) को लगाकर स्नान करना चाहिए। सप्तमी, अमावस्या, नवमी, द्वितीया, दशमीत्रयोदशी को तिल एवं आंवले का प्रयोग वर्जित है। इसके बाद व्रती को जल से निकल कर शुद्ध वस्त्र धारण कर विधि-विधानपूर्वक भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। यह ध्यान रहे कि कार्तिक मास में स्नान व व्रत करने वाले को केवल नरक चतुर्दशी[2] को ही तेल लगाना चाहिए। शेष दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

  • कार्तिक के पूरे महीने में ब्रज की महिलायें झुण्ड के झुण्ड बनाकर गीत गाती हुई, यमुना या कुण्ड स्नान करती हैं और राधा-दामोदार की पूजा करती हैं।
  • इस दिन अकबरपुर तथा शेरगढ़ के मध्य तरौली का गाँव में स्वामी का मेला लगता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. आधा शरीर जल में डूबा हो।
  2. कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
  3. कार्तिक स्नान फल दिलायेगा त्रिकार्तिक व्रत (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर, 2013।
  4. 'कार्तिक माह में सूर्योदय से पूर्व स्नान के लाभ (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 18 अक्टूबर, 2013।

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