ईद उल फ़ितर  

ईद उल फ़ितर
ईद पर नमाज़ पढ़ते लोग
अनुयायी मुस्लिम, भारतीय
उद्देश्य इस दिन मुसलमान किसी पाक साफ़ जगह पर जिसे 'ईदगाह' कहते हैं, वहाँ इकट्ठे होकर दो रक्आत नमाज़ शुक्राने की अदा करते हैं।
तिथि रमज़ान के बाद शव्वाल महीने के पहले दिन 'ईद' मनायी जाती है।
उत्सव इस ईद में मुसलमान 30 दिनों के बाद पहली बार दिन में खाना खाते हैं। उपवास की समाप्ति की खुशी के अलावा, इस ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीने भर के उपवास रखने की शक्ति दी।
धार्मिक मान्यता ईद के दौरान बढ़िया खाने के अतिरिक्त, नए कपड़े भी पहने जाते हैं और परिवार और दोस्तों के बीच तोहफ़ों का आदान-प्रदान होता है।
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फ़ितरा ईदगाह में नमाज़ पढ़ने के लिए जाने से मुसलमान लोग 'फ़ितरा' अर्थात् 'जान व माल का सदक़ा' जो हर मुसलमान पर फ़र्ज होता है, वह ग़रीबों में बांटा जाता है।
शबे-क़द्र रमज़ान के महीने के आख़री दस दिनों में एक रात ऐसी है जिसे शबे-क़द्र कहते हैं। यह रात हज़ार महीने की इबादत करने से भी अधिक बेहतर होती है। शबे-क़द्र का अर्थ है, वह रात जिसकी क़द्र की जाए।
अन्य जानकारी पहला ईद उल-फ़ितर पैगम्बर मुहम्मद ने सन 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया था।

ईद-उल-फ़ितर मुसलमानों का पवित्र त्योहार है। यह रमज़ान के 30 दिन के पश्चात चांद देख कर दूसरे दिन मनाया जाने वाला एक पर्व विशेष है।[1] रमज़ान के पूरे महीने में मुसलमान रोज़े रखकर अर्थात् भूखे-प्यासे रहकर पूरा महीना अल्लाह की इबादत में गुज़ार देते हैं। इस पूरे महीने को अल्लाह की इबादत में गुज़ार कर जब वे रोज़ों से फ़ारिग हो जाते हैं तो चांद की पहली तारीख़ अर्थात् जिस दिन चांद दिखाई देता है, उस रोज़ को छोड़कर दूसरे दिन ईद का त्योहार अर्थात् ‘बहुत ख़ुशी का दिन’ मनाया जाता है। इस ख़ुशी के दिन को ईद-उल-फ़ितर कहते हैं।

ईद पर गले मिलते हुए

ईद-उल-फ़ित्‌र का अर्थ

'ईद-उल-फ़ित्‌र' दरअसल दो शब्द हैं। 'ईद' और 'फ़ित्‌र'। असल में 'ईद' के साथ 'फ़ित्‌र' को जोड़े जाने का एक ख़ास मक़सद है। वह मक़सद है रमज़ान में ज़रूरी की गई रुकावटों को ख़त्म करने का ऐलान। साथ ही छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब सबकी ईद हो जाना। यह नहीं कि पैसे वालों ने, साधन-संपन्न लोगों ने रंगारंग, तड़क-भड़क के साथ त्योहार मना लिया व ग़रीब-गुरबा मुंह देखते रह गए। शब्द 'फ़ित्‌र' के मायने चीरने, चाक करने के हैं और ईद-उल-फ़ित्‌र उन तमाम रुकावटों को भी चाक कर देती है, जो रमज़ान में लगा दी गई थीं। जैसे रमज़ान में दिन के समय खाना-पीना व अन्य कई बातों से रोक दिया जाता है। ईद के बाद आप सामान्य दिनों की तरह दिन में खा-पी सकते हैं।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पौराणिक कोश |लेखक: राणा प्रसाद शर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 562, परिशिष्ट 'घ' |
  2. 2.0 2.1 2.2 ईद-उल-फित्र : मुरादें पूरी होने का दिन (हिंदी) वेबदुनिया हिंदी। अभिगमन तिथि: 8 अगस्त, 2013।

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