परशुराम जयन्ती  

परशुराम जयन्ती
परशुराम
अनुयायी हिंदू
उद्देश्य परशुराम जयंती एक व्रत और उत्सव के तौर पर मनाई जाती है।
प्रारम्भ पौराणिक काल
तिथि वैशाख शुक्ल तृतीया
उत्सव स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प करे और दिन में उपवास अथवा फलाहार कर दोपहर में परशुराम का पूजन करे तथा उनकी कथा सुनेंl
अन्य जानकारी इनका नाम तो राम था, किन्तु शिव द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये 'परशुराम' कहलाते थे।

परशुराम जयन्ती वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात् अक्षय तृतीया को मनाई जाती है। परशुराम की कथाएं रामायण, महाभारत एवं कुछ पुराणों में पाई जाती हैं। पूर्व के अवतारों के समान इनके नाम का स्वतंत्र पुराण नहीं है।

अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः ।
इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ।।

अर्थ : चार वेद मौखिक हैं अर्थात् पूर्ण ज्ञान है एवं पीठपर धनुष्य-बाण है अर्थात् शौर्य है। अर्थात् यहां ब्राह्मतेज एवं क्षात्रतेज, दोनों हैं। जो कोई इनका विरोध करेगा, उसे शाप देकर अथवा बाणसे परशुराम पराजित करेंगे। ऐसी उनकी विशेषता है।

परशुराम मूर्ति

भगवान परशुराम की मूर्ति के लक्षण भीमकाय देह, मस्तक पर जटाभार, कंधे पर धनुष्य एवं हाथ में परशु है।

पूजा विधि

परशुराम श्रीविष्णु के अवतार हैं, इसलिए उन्हें उपास्य देवता मानकर पूजा जाता है। वैशाख शुक्ल तृतीया की परशुराम जयंती एक व्रत और उत्सव के तौर पर मनाई जाती है। स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प करे और दिन में उपवास अथवा फलाहार कर दोपहर में परशुराम का पूजन करे तथा उनकी कथा सुनेंl

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. परशुराम जयन्ती (हिंदी) ई-पुरोहित डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 31 मई, 2013।

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