भीष्म अष्टमी  

भीष्म अष्टमी अथवा भीमाष्टमी व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस दिन महाभारत के पौराणिक पात्र भीष्म पितामह को अपनी इच्छा अनुसार मृ्त्यु प्राप्त हुई थी। भीष्म पितामह को बाल ब्रह्मचारी और कौरवों के पूर्वजों के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भीष्म के नाम से पूजन और तर्पण करने से वीर और सत्यवादी संतान की प्राप्ति होती है।


भीष्म

महाराज शांतनु तथा देवी गंगा के पुत्र भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की अखंड प्रतिज्ञा ली थी। उनका पूरा जीवन सत्य और न्याय का पक्ष लेते हुए व्यतीत हुआ। यही कारण है कि महाभारत के सभी पात्रों में भीष्म पितामह अपना एक विशिष्ट स्थान रखते है। इनका जन्म का नाम 'देवव्रत' था, परन्तु अपने पिता के लिये इन्होंने आजीवन विवाह न करने का प्रण लिया था, इसी कारण से इनका नाम 'भीष्म' पड़ा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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