पौष पूर्णिमा  

पौष पूर्णिमा
पौष पूर्णिमा पर स्नान करते लोग
विवरण 'पौष पूर्णिमा' हिन्दू धर्म में मान्य पवित्र पूर्णिमा तिथियों में से एक है। इस दिन नदियों में स्नान, दान तथा भगवान विष्णु का ध्यान और उनकी पूजा का विशेष महत्त्व है।
तिथि पौष माह, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा (15वीं तिथि)
महत्त्व इस दिन गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और आत्मा तीनों नए हो जाते हैं।
विशेष जैन धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।
अन्य जानकारी पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर तीर्थराज प्रयाग में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और माघ पूर्णिमा के दिन आयोजित होते हैं।

पौष पूर्णिमा (अंग्रेज़ी: Paush Purnima) विक्रम संवत के दसवें माह पौष के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि है। ऐसी मान्यता है कि पौष मास के दौरान जो लोग पूरे महीने भगवान का ध्यान कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। इस दिन काशी, प्रयाग और हरिद्वार में स्नान का विशेष महत्व होता है। जैन धर्मावलंबी इस दिन 'शाकंभरी जयंती' मनाते हैं तो वहीं, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से 'छेरता' पर्व मनाती हैं।[1]

महत्व

ज्योतिष तथा जानकारों का कहना है कि पौष महीने में सूर्य देव ग्यारह हजार रश्मियों के साथ तप करके सर्दी से राहत देते हैं। पौष के महीने में सूर्य देव की विशेष पूजा, उपासना से मनुष्य जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति पा सकता है। पौष पूर्णिमा के दिन गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्त्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से तन, मन और आत्मा तीनों नए हो जाते हैं। इसीलिए इस दिन संगम के तट पर स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पौष का महीना सूर्य देव का महीना माना जाता है। पूर्णिमा की तिथि चन्द्रमा के अनुसार होती है। सूर्य-चन्द्रमा का यह अद्भुत संयोग केवल पौष पूर्णिमा को ही मिलता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों की उपासना से पूरी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ग्रहों की बाधा शांत होती है और मोक्ष का वरदान भी मिलता है।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 पौष पूर्णिमा पर लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी (हिंदी) /navbharattimes.indiatimes.com। अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर, 2016।
  2. भाग्य संवारेगा पौष पूर्णिमा का महास्नान (हिंदी) aajtak.intoday.in। अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर, 2016।
  3. समस्त पापों से छुटकारा दिलाता है माघ मास (हिंदी) hindi.webdunia.com। अभिगमन तिथि: 23 नवम्बर, 2016।

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