कालभैरवाष्टमी  

कालभैरवाष्टमी
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अनुयायी हिंदू
तिथि मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी
उत्सव इस दिन भैरव मंदिरों में विशेष पूजन और श्रृंगार बडे धूमधाम से होता है।
धार्मिक मान्यता कलियुग में काल के भय से बचने के लिए कालभैरव की आराधना सबसे अच्छा उपाय है। कालभैरव को शिव का ही रूप माना गया है।
अन्य जानकारी भैरव जी का वाहन श्वान (कुत्ता) है, अत: इस दिन कुत्तों को मिठाई आदि खिलानी चाहिए।

कालभैरवाष्टमी मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। भगवान शिव के अवतार कहे जाने वाले 'कालभैरव' का अवतार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इस संबंध में शिवपुराण की 'शतरुद्रसंहिता' में बताया गया है। शिवजी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया और यह स्वरूप भी भक्तों को मनोवांछित फल देने वाला है।

महत्त्व

हिंदू धर्म ग्रन्थों के अध्ययन से यह तथ्य विदित होता है कि भगवान शंकर के कालभैरव स्वरूप का आविर्भाव मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की प्रदोष काल, व्यापिनी अष्टमी में हुआ था। अत: यह तिथि 'कालभैरवाष्टमी' के नाम से विख्यात हो गई। इस दिन भैरव मंदिरों में विशेष पूजन और श्रृंगार बडे धूमधाम से होता है। भैरवनाथ के भक्त कालभैरवाष्टमी के व्रत को अत्यन्त श्रद्धा के साथ रखते हैं। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी से प्रारम्भ करके प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी अष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा, दर्शन तथा व्रत करने से भीषण संकट दूर होते हैं और कार्य-सिद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। पंचांगों में इस अष्टमी को 'कालाष्टमी' के नाम से प्रकाशित किया जाता है।[1]

व्रत की विधि

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कालभैरव के निमित्त व्रत उपवास रखने पर जल्द ही भक्तों की इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस व्रत की विधि इस प्रकार है-

  • व्रत करने वाले को कालभैरवाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।
  • स्नान आदि कर्म से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करना चाहिए और तत्पश्चात् किसी भैरव मंदिर जाये।
  • व्रती को मंदिर जाकर भैरव महाराज की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही उनके वाहन की भी पूजा करे।
  • पूजा के समय ही 'ऊँ भैरवाय नम:' मंत्र से षोडशोपचारपूर्वक पूजन करना चाहिए।
  • भैरव जी का वाहन श्वान (कुत्ता) है, अत: इस दिन कुत्तों को मिठाई आदि खिलानी चाहिए।
  • व्रत करने वाले को इस शुभ दिन में फल का आहार ग्रहण करना चाहिए।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. साक्षात रुद्र हैं श्रीभैरवनाथ (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर, 2013।
  2. कालभैरव अष्टमी की व्रत विधि (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 30 अक्टूबर, 2013।

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